टिकुली कला, बिहार की लोककला, बिहटा टिकुली कला, टिकुली पेंटिंग, बिहार संस्कृति, लोककला संरक्षण, टिकुली कला प्रशिक्षण
बिहटा के मचहलपुर में टिकुली कला कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बिहार की पारंपरिक लोककला के संरक्षण, प्रशिक्षण और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसरों पर जोर दिया गया।
📢 We News 24 Digital News / वी न्यूज 24 डिजिटल
बिहटा, पटना। बिहार की पारंपरिक टिकुली कला को बढ़ावा देने और ग्रामीण लोककला, संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण के उद्देश्य से जय हिन्द सीएलएफ के प्रांगण, मचहलपुर, लई, बिहटा में टिकुली कला कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यशाला में प्रियंका कुमारी, सभापति नगर परिषद बिहटा, अजातशत्रु, संस्थापक एमजी सोशल केयर फाउंडेशन, अमित कुमार सिंह, जिला समन्वयक एमजी सोशल केयर फाउंडेशन, निराला जी, जीविका बिहटा, सागरिका वत्स, प्रशिक्षक और बबलू कुमार, प्रखंड समन्वयक बिहटा सहित कई लोग मौजूद रहे।
नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगर परिषद बिहटा की सभापति प्रियंका कुमारी ने कहा कि टिकुली कला बिहार की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस कला के माध्यम से देवी-देवताओं के चित्रों के अलावा ग्रामीण जीवन, लोककथाओं, विवाह, त्योहारों तथा रामायण और कृष्ण लीला के विभिन्न प्रसंगों को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाओं से पारंपरिक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलती है। साथ ही स्थानीय कलाकारों और महिलाओं के लिए कला के माध्यम से स्वरोजगार के नए अवसर भी तैयार किए जा सकते हैं।
ये खबर भी पढ़े-
प्रशिक्षण और प्रोत्साहन पर जोर
एमजी सोशल केयर फाउंडेशन के संस्थापक अजातशत्रु ने कहा कि टिकुली कला जैसी पारंपरिक कलाओं को जीवंत बनाए रखने के लिए लगातार प्रशिक्षण और प्रोत्साहन जरूरी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद प्रतिभाओं को उचित मंच और प्रशिक्षण मिले तो वे इस कला को आगे बढ़ाने के साथ अपनी आजीविका भी मजबूत कर सकते हैं।
वहीं फाउंडेशन के जिला समन्वयक अमित कुमार सिंह ने कहा कि कला और संस्कृति से जुड़े ऐसे आयोजन ग्रामीण प्रतिभाओं को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का बेहतर अवसर प्रदान करते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर पारंपरिक कला को पहचान मिलने के साथ युवाओं और महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ सकती है।
ये खबर भी पढ़े-
प्रतिभागियों को सिखाई गई टिकुली कला की बारीकियां
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को टिकुली कला की तकनीक, पारंपरिक चित्रांकन और विभिन्न विषयों को कलात्मक रूप देने की जानकारी दी गई। प्रशिक्षक सागरिका वत्स ने प्रतिभागियों को कला की बारीकियों और पारंपरिक शैली के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने बिहार की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने तथा इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
ये खबर भी पढ़े-
BJP New Team: नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम का जल्द ऐलान संभव, महिला-युवा चेहरों पर रहेगा फोकस
कला से आजीविका बढ़ाने की पहल
आयोजकों के मुताबिक कार्यशाला का उद्देश्य केवल टिकुली कला को संरक्षित करना नहीं, बल्कि इसके प्रचार-प्रसार के साथ कला आधारित आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और स्थानीय कलाकारों को प्रशिक्षण देकर उन्हें बाजार से जोड़ने की दिशा में ऐसी पहल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
कार्यक्रम के दौरान टिकुली कला के संरक्षण, संवर्धन और इसके व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया गया।
रिपोर्ट: कलीम अंसारी , पटना संवाददाता | We News 24
कोई टिप्पणी नहीं
कोमेंट करनेके लिए धन्यवाद