Vande Mataram Controversy: अधूरे ‘वंदे मातरम’ पर खरगे का पलटवार, बोले- ‘अपराध है तो गांधी-नेहरू पर भी मामला दर्ज करें’
गोवा में अधूरे वंदे मातरम को लेकर उठे विवाद पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पलटवार किया। बोले- अगर यह अपराध है तो गांधी, नेहरू और पटेल पर भी मामला दर्ज करें।
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नई दिल्ली। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर देश में जारी सियासी विवाद के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने बयान से राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। गोवा में कांग्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान उनकी मौजूदगी में कथित तौर पर अधूरा वंदे मातरम गाए जाने के बाद विवाद खड़ा हुआ था। मामले को लेकर शिकायत भी सामने आई है।
अब खरगे ने इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्होंने वही वंदे मातरम गाया है, जिसे महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल के दौर में कांग्रेस की परंपरा के तहत गाया जाता रहा है।
‘अपराध है तो गांधी और नेहरू पर भी मामला दर्ज करें’
मल्लिकार्जुन खरगे ने विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर उनके द्वारा गाए गए वंदे मातरम को अपराध माना जा रहा है तो पहले उन ऐतिहासिक नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने कांग्रेस की बैठकों में इसी परंपरा का पालन किया था।
खरगे ने कहा कि उन्होंने वही ‘वंदे मातरम’ गाया है, जिसे महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू भी गाते थे। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इसे अपराध माना जाता है तो गांधी जी, नेहरू जी और सरदार पटेल के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि देश के राष्ट्रीय प्रतीकों और उनसे जुड़ी परंपराओं को लेकर फैसले ऐतिहासिक संदर्भों और संवैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर किए जाने चाहिए। उनके मुताबिक, केवल किसी सरकार के कह देने भर से कोई बात स्वतः राष्ट्रीय मानक नहीं बन जाती।
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कांग्रेस की पुरानी परंपरा का दिया हवाला
खरगे ने अपने बयान में कांग्रेस के पुराने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी लंबे समय से वंदे मातरम को एक निश्चित परंपरा के तहत गाती रही है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने आजादी से पहले ही देश के लिए राष्ट्रीय गीत से संबंधित प्रस्ताव पारित किए थे।
उनका कहना था कि किसी भी सरकार के कार्यकाल में बनाए गए राजनीतिक मानकों को स्थायी राष्ट्रीय परंपरा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सरकारें बदलती रहती हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में नियम एवं संस्थागत परंपराएं व्यापक सहमति के आधार पर आगे बढ़ती हैं।
गोवा में अधूरे वंदे मातरम को लेकर उठा विवाद
दरअसल, गोवा में कांग्रेस के कार्यक्रम के दौरान खरगे की मौजूदगी में वंदे मातरम का गायन हुआ था। आरोप है कि कार्यक्रम में राष्ट्रगीत को पूरा नहीं गाया गया, जिसके बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
विरोधी पक्ष की ओर से इस मामले को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ शिकायत किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, पूरे घटनाक्रम को लेकर अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
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चुनाव को लेकर कांग्रेस नेताओं को खरगे की नसीहत
वंदे मातरम विवाद के बीच खरगे ने आगामी चुनावों को लेकर कांग्रेस नेताओं को एकजुट रहने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी नेताओं से मुलाकात कर उनकी चिंताओं को सुना और सभी से मिलकर चुनाव लड़ने पर जोर दिया।
खरगे के मुताबिक, कांग्रेस नेताओं ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे और इस बार जीत हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय सरकार की ओर से कांग्रेस नेताओं को डराने और दबाव में लेने की कोशिशें की जा रही हैं। खरगे ने कहा कि ऐसे प्रयास कांग्रेस नेताओं के हौसले को नहीं तोड़ सकते।
‘लोकतंत्र में सरकार को नियमों के दायरे में रहना चाहिए’
कांग्रेस अध्यक्ष ने लोकतांत्रिक व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि सत्ता में आने वाली किसी भी सरकार को जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए। उनके मुताबिक, सरकार बदलने के बाद भी लोकतांत्रिक संस्थाओं और नियमों का सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
खरगे ने कहा कि कांग्रेस शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव लड़ने और जनता का समर्थन हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
फिलहाल ‘वंदे मातरम’ के गायन और उसके तरीके को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। खरगे के ताजा बयान के बाद यह विवाद आने वाले दिनों में और गरमाने की संभावना है।
रिपोर्ट: नीरज तिवारी, राष्ट्रीय संवाददाता | We News 24
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