दिल्ली में CJP संस्थापक अभिजीत दीपके गिरफ्तार: दूसरी बार पुलिस की कार्रवाई, दो साथी तिहाड़ जेल में; लोकतांत्रिक विरोध पर उठे सवाल
'लहरा दो तिरंगा' प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, BNSS की धारा 126 और 170 के तहत गिरफ्तारी; AISA अध्यक्ष नेहा बोरा रिहा, सौरव दास और आशुतोष रांका पहले से न्यायिक हिरासत में
📢 We News 24 Digital News / वी न्यूज 24 डिजिटल
रिपोर्टर: दीपक कुमार, वरिष्ठ संवाददाता | स्थान: नई दिल्ली | प्रकाशित: 16 अक्टूबर 2026
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और पुलिस की एहतियाती कार्रवाई को लेकर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका के आधार पर गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, दीपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई है। उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
इस कार्रवाई ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए।
एक सप्ताह में दूसरी बार पुलिस की कार्रवाई
अभिजीत दीपके के खिलाफ यह हाल के दिनों में दूसरी एहतियाती कार्रवाई है।
इससे पहले 10 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने दीपके और उनके दो सहयोगियों सौरव दास तथा आशुतोष रांका को दिल्ली हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया था।
ये खबर भी पढ़े-
दिल्ली में 35 हजार छात्र NGO करेंगे यमुना सफाई! छठ महापर्व से पहले 'चलो यमुना' अभियान का शंखनाद, 70 घाटों की तैयारी
11 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत से तीनों को रिहाई मिली थी। रिपोर्टों के अनुसार, उनसे शांति बनाए रखने के संबंध में 50 हजार रुपये के जमानती बॉन्ड भरवाए गए थे।
अब दोबारा कार्रवाई होने के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि पिछली रिहाई के दौरान तय की गई शर्तों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
इस संबंध में अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
'लहरा दो तिरंगा' मार्च से पहले पुलिस हुई सक्रिय
CJP और उससे जुड़े कार्यकर्ता दिल्ली में 'लहरा दो तिरंगा' नाम से विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की तैयारी कर रहे थे।
इस प्रदर्शन में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे।
प्रदर्शनकारियों की मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा भी शामिल था।
दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका के आधार पर एहतियाती कदम उठाए।
हालांकि, CJP से जुड़े लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे विरोध की आवाज दबाने का प्रयास बताया है।
ये खबर भी पढ़े-
नेहा बोरा को हिरासत के बाद किया गया रिहा
दिल्ली पुलिस ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी 16 अक्टूबर की शाम एहतियातन हिरासत में लिया था।
हालांकि, दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें 17 अक्टूबर को रिहा कर दिया गया।
नेहा बोरा की रिहाई के बावजूद छात्र संगठन ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध जारी रखने की बात कही है।
CJP के दो नेता पहले से तिहाड़ जेल में
CJP के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका पहले से तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, दोनों को जंतर-मंतर क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन से संबंधित घटनाक्रम के बाद गिरफ्तार किया गया था।
उन्हें पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
जेल में सुरक्षा कारणों से दोनों को अलग-अलग स्थानों पर रखने की जानकारी भी सामने आई है।
अभिजीत दीपके के खिलाफ नई कार्रवाई के बाद यह चर्चा तेज है कि क्या उन्हें भी हिरासत में भेजा जा सकता है।
हालांकि, 17 अक्टूबर को उपलब्ध रिपोर्टों में दीपके को तिहाड़ भेजे जाने के किसी अंतिम आदेश की पुष्टि नहीं हुई है।
BNSS की धारा 126 और 170 क्या कहती हैं?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड मांग सकता है, जिसके संबंध में सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका का कानूनी आधार मौजूद हो।
वहीं, धारा 170 के तहत पुलिस कुछ निर्धारित परिस्थितियों में किसी संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है।
इन प्रावधानों का उद्देश्य संभावित अपराध या शांति भंग की घटना को रोकना है।
लेकिन एहतियाती गिरफ्तारी और किसी अपराध में दोषी सिद्ध होने के बीच कानूनी अंतर है।
किसी व्यक्ति के खिलाफ इन धाराओं के तहत कार्रवाई होने का अर्थ यह नहीं है कि उसे किसी आपराधिक आरोप में दोषी ठहरा दिया गया है।
CJP की लीगल हेड ने उठाए सवाल
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी की जानकारी साझा की।
उन्होंने दीपके के ठिकाने और वकीलों से संपर्क को लेकर भी चिंता जताई।
संगठन की ओर से पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति व्यक्त की गई है।
दूसरी ओर, पुलिस का पक्ष है कि संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या को रोकने के लिए एहतियाती कार्रवाई की गई।
लोकतांत्रिक विरोध और पुलिस कार्रवाई पर बड़ी बहस
भारत का संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण, बिना हथियारों के एकत्र होने का अधिकार प्रदान करता है।
हालांकि, ये अधिकार पूर्णतः निरपेक्ष नहीं हैं। सार्वजनिक व्यवस्था और अन्य वैध कारणों से कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
ऐसे में किसी प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि क्या उसके लिए पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद था और क्या अपनाए गए कदम आवश्यक तथा अनुपातिक थे।
अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी के मामले में भी यही सवाल उठ रहे हैं।
WE NEWS 24 के सवाल
अभिजीत दीपके के खिलाफ दूसरी बार की गई एहतियाती कार्रवाई कई महत्वपूर्ण सवाल छोड़ती है।
क्या पुलिस के पास सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका के पर्याप्त आधार थे?
क्या प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का उचित अवसर मिला?
क्या पिछली रिहाई के दौरान निर्धारित बॉन्ड की शर्तों का वास्तव में उल्लंघन हुआ?
और क्या एहतियाती गिरफ्तारी के बजाय कोई कम प्रतिबंधात्मक विकल्प उपलब्ध था?
इन सवालों का जवाब पुलिस रिकॉर्ड, संबंधित आदेशों और कानूनी कार्यवाही के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन, नागरिक स्वतंत्रता और पुलिस की शक्तियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
WE NEWS 24 इस मामले में आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई और संबंधित पक्षों के बयानों पर नजर बनाए रखेगा।



कोई टिप्पणी नहीं
कोमेंट करनेके लिए धन्यवाद