दिल्ली में 35 हजार छात्र NGO करेंगे यमुना सफाई! छठ महापर्व से पहले 'चलो यमुना' अभियान का शंखनाद, 70 घाटों की तैयारी
भाजपा दिल्ली प्रदेश कार्यालय में पूर्वांचल मोर्चा और छठ पूजा समितियों की अहम बैठक; संतोष ओझा ने यमुना में छठ पूजा पर पूर्ववर्ती सरकार की पाबंदियों को लेकर उठाए सवाल, मोहन लाल गिहारा ने बताया यमुना को स्वच्छ बनाने का रोडमैप
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रिपोर्टर: दीपक कुमार, वरिष्ठ संवाददाता | स्थान: नई दिल्ली | प्रकाशित: 16 अक्टूबर 2026
नई दिल्ली। आस्था, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण को एक सूत्र में पिरोने की दिशा में दिल्ली में एक बड़े जनभागीदारी अभियान की तैयारी की जा रही है। आगामी 18 अक्टूबर को प्रस्तावित 'चलो यमुना' अभियान के तहत यमुना नदी की सफाई के लिए हजारों छात्र-छात्राओं, सामाजिक संगठनों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA), धार्मिक समितियों और भाजपा कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की योजना बनाई गई है।
आयोजकों के अनुसार, इस अभियान में दिल्ली के लगभग 60 कॉलेजों के करीब 35 हजार छात्र-छात्राओं की भागीदारी प्रस्तावित है। अभियान का उद्देश्य केवल यमुना की सफाई करना नहीं, बल्कि आगामी 15 नवंबर को मनाए जाने वाले लोक आस्था के महापर्व छठ के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण तैयार करना भी है।
इसी अभियान की तैयारियों और छठ पूजा व्यवस्थाओं को लेकर 16 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली प्रदेश कार्यालय, पंडित दीनदयाल उपाध्याय मार्ग में दिल्ली प्रदेश पूर्वांचल मोर्चा एवं छठ पूजा समितियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
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बैठक का नेतृत्व दिल्ली प्रदेश पूर्वांचल मोर्चा अध्यक्ष संतोष ओझा और प्रदेश महामंत्री मोहन लाल गिहारा ने किया। इसमें दिल्ली के विभिन्न जिलों के पूर्वांचल मोर्चा जिला अध्यक्षों, मंत्रियों, संगठनात्मक पदाधिकारियों के साथ दिल्ली प्रदेश की छठ पूजा समितियों के अध्यक्षों एवं महासचिवों ने भाग लिया।
यमुना की सफाई केवल अभियान नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सवाल
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि यमुना नदी दिल्ली की जीवनरेखा होने के साथ-साथ पूर्वांचल समाज की धार्मिक आस्था का भी प्रमुख केंद्र है।
छठ महापर्व में भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने की परंपरा है। ऐसे में स्वच्छ जल, सुरक्षित घाट और प्रदूषणमुक्त वातावरण की व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि यमुना की सफाई को केवल एक दिन के प्रतीकात्मक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे निरंतर चलने वाले जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाना चाहिए।
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60 कॉलेजों के 35 हजार छात्र-छात्राओं की भागीदारी का लक्ष्य
18 अक्टूबर को प्रस्तावित 'चलो यमुना' अभियान को लेकर व्यापक तैयारियों की जानकारी दी गई।
आयोजकों के अनुसार, दिल्ली के लगभग 60 कॉलेजों से करीब 35 हजार छात्र-छात्राओं को अभियान से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अतिरिक्त दिल्ली की विभिन्न RWA, सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाएं, स्वयंसेवी संगठन, सोसाइटियों के प्रतिनिधि, छठ पूजा समितियां और पूर्वांचल समाज के कार्यकर्ता भी अभियान में भाग लेंगे।
इस पहल के माध्यम से युवा पीढ़ी को नदियों के संरक्षण, जल प्रदूषण के दुष्परिणाम और पर्यावरण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देने की योजना है।
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WE ARE ONE PURVANCHAL FOUNDATION भी करेगा भागीदारी
महरौली जिले की सामाजिक संस्था WE ARE ONE PURVANCHAL FOUNDATION TRUST के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता भी 'चलो यमुना' अभियान में सक्रिय भागीदारी करेंगे।
संस्था की ओर से यमुना की स्वच्छता और छठ महापर्व की तैयारियों को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है।
संस्था के अध्यक्ष दीपक कुमार महा सचिव राहुल सिंह ,बबलू सिंह के नेतृत्व में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भागीदारी की तैयारी है।
संस्था का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक एकता को मजबूत करना है।
यमुना में 70 छठ घाट तैयार करने की योजना
बैठक में आगामी छठ महापर्व को लेकर दिल्ली सरकार की तैयारियों पर भी चर्चा हुई।
बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार की ओर से इस बार यमुना क्षेत्र में लगभग 70 छठ घाटों की व्यवस्था करने की योजना है।
वक्ताओं ने कहा कि छठ व्रतियों को स्वच्छ घाट, सुरक्षित पहुंच मार्ग, पर्याप्त प्रकाश, पेयजल, सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।
हालांकि घाटों की अंतिम संख्या, उनके स्थान और यमुना में पूजा की अनुमति की शर्तों की पुष्टि संबंधित सरकारी विभागों की आधिकारिक अधिसूचनाओं से होना आवश्यक है।
संतोष ओझा का केजरीवाल सरकार पर हमला, यमुना में छठ पूजा पर पाबंदी को लेकर उठाए सवाल
बैठक को संबोधित करते हुए दिल्ली प्रदेश पूर्वांचल मोर्चा अध्यक्ष संतोष ओझा ने पूर्ववर्ती अरविंद केजरीवाल सरकार की यमुना नीति पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार ने यमुना में छठ पूजा पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) का हवाला देकर अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने का प्रयास किया।
ओझा ने दावा किया कि यमुना में छठ पूजा पर रोक के लिए NGT की ओर से वैसी पाबंदी नहीं लगाई गई थी, जैसी पूर्ववर्ती सरकार द्वारा बताई जाती रही।
उन्होंने वर्तमान भाजपा सरकार की नीतियों को पूर्वांचल समाज की आस्था के प्रति संवेदनशील बताते हुए छठ पूजा के लिए बेहतर व्यवस्थाओं का भरोसा जताया।
हालांकि, NGT के आदेशों, पर्यावरण संबंधी प्रतिबंधों और पूर्ववर्ती सरकार के निर्णयों की वास्तविक कानूनी स्थिति अलग से जांच का विषय है। ओझा के आरोपों को बैठक में दिए गए राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।
'यमुना मैया सूर्यदेव की पुत्री और यमराज की बहन' — संतोष ओझा
संतोष ओझा ने अपने संबोधन में यमुना नदी के धार्मिक और पौराणिक महत्व का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यमुना मैया भगवान सूर्य की पुत्री, यमराज की बहन और शनिदेव की सौतेली बहन मानी जाती हैं।
उनका कहना था कि सूर्योपासना के महापर्व छठ में यमुना नदी का विशेष आध्यात्मिक महत्व है।
ओझा ने कहा कि जब छठ व्रती भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं, तब स्वच्छ जल और पवित्र नदी का महत्व और बढ़ जाता है।
उन्होंने पूर्वांचल समाज से यमुना की स्वच्छता के अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।
डेढ़ से दो वर्षों में यमुना को स्वच्छ बनाने का लक्ष्य: मोहन लाल गिहारा
दिल्ली प्रदेश महामंत्री मोहन लाल गिहारा ने यमुना सफाई अभियान की तैयारियों और प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि यमुना की सफाई केवल नदी के किनारों से कचरा हटाने तक सीमित नहीं रह सकती। इसके लिए नदी में गिरने वाले गंदे नालों, सीवेज और औद्योगिक रासायनिक अपशिष्ट को रोकना आवश्यक है।
गिहारा के अनुसार, यमुना में प्रदूषित पानी के प्रवाह को रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को दुरुस्त करने और जल शोधन व्यवस्था को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले डेढ़ से दो वर्षों में इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम दिखाई देंगे और यमुना को स्वच्छ एवं अविरल बनाने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
हालांकि नदी को पूर्ण रूप से प्रदूषणमुक्त बनाने की समयसीमा और वास्तविक प्रगति का मूल्यांकन जल गुणवत्ता के वैज्ञानिक आंकड़ों तथा संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट से ही किया जा सकेगा।
यमुना सफाई के लिए मिले धन पर भी उठाए भ्रष्टाचार के सवाल
बैठक में पूर्ववर्ती दिल्ली सरकार के कार्यकाल में यमुना सफाई पर खर्च किए गए सरकारी धन को लेकर भी सवाल उठाए गए।
संतोष ओझा ने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में यमुना की सफाई के नाम पर केंद्र से बड़ी धनराशि प्राप्त होने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।
उन्होंने इस दौरान भ्रष्टाचार और धन के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि, प्राप्त धनराशि का वास्तविक विवरण, खर्च का लेखा-जोखा और किसी सक्षम जांच एजेंसी के निष्कर्ष इस बैठक में प्रस्तुत जानकारी से स्थापित नहीं होते।
इसलिए यमुना सफाई पर हुए खर्च और उससे प्राप्त परिणामों का निष्पक्ष ऑडिट तथा सार्वजनिक जवाबदेही महत्वपूर्ण सवाल बने हुए हैं।
छठ पूजा समितियों के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था पर जोर
बैठक में छठ पूजा समितियों को आयोजन की अनुमति प्राप्त करने में आने वाली प्रशासनिक कठिनाइयों पर भी चर्चा हुई।
संतोष ओझा ने बताया कि दिल्ली सरकार ने इस वर्ष छठ पूजा आयोजनों की अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से सिंगल विंडो व्यवस्था लागू करने की पहल की है।
इसका उद्देश्य समितियों को अलग-अलग सरकारी विभागों के चक्कर लगाने से राहत देना और अनुमति प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाना है।
हालांकि आयोजकों को निर्धारित नियमों, सुरक्षा मानकों, पर्यावरण संबंधी शर्तों और संबंधित एजेंसियों की स्वीकृति का पालन करना होगा।
महरौली सहित दिल्ली के सभी जिलों की भागीदारी महत्वपूर्ण
बैठक में दिल्ली के विभिन्न जिलों से पहुंचे पूर्वांचल मोर्चा पदाधिकारियों और छठ पूजा समिति प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने अभियान को व्यापक संगठनात्मक स्वरूप दिया।
महरौली सहित दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय सामाजिक संगठनों और छठ पूजा समितियों से भी लोगों को यमुना स्वच्छता अभियान के प्रति जागरूक करने की अपेक्षा जताई गई।
बैठक का संदेश था कि यमुना की स्वच्छता किसी एक सरकार, राजनीतिक दल या संगठन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि दिल्ली के प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व है।
WE NEWS 24 का सवाल: क्या इस बार छठ व्रतियों को मिलेगी स्वच्छ यमुना?
18 अक्टूबर का 'चलो यमुना' अभियान जनभागीदारी के लिहाज से एक महत्वपूर्ण पहल बन सकता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस अभियान का असर यमुना की वास्तविक जल गुणवत्ता पर भी दिखाई देगा?
क्या दिल्ली के नालों से निकलने वाला अशोधित सीवेज यमुना में गिरना बंद होगा? क्या औद्योगिक इकाइयों के रासायनिक अपशिष्ट पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा? क्या सभी छठ घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ व्यवस्था सुनिश्चित होगी?
इन सवालों के जवाब केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीनी परिणामों से मिलेंगे।
छठ महापर्व पूर्वांचल समाज की आस्था, त्याग, अनुशासन और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। ऐसे में यमुना की सफाई का अभियान धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी बड़ा अवसर है।
अब निगाहें 18 अक्टूबर के 'चलो यमुना' अभियान और 15 नवंबर के छठ महापर्व की तैयारियों पर टिकी हैं। सवाल यही है कि क्या इस बार दिल्ली की यमुना में आस्था और स्वच्छता का वास्तविक संगम दिखाई देगा?
— दीपक कुमार, WE NEWS 24, नई दिल्ली










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