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    अब ड्राइविंग लाइसेंस से पता चलेगा कौन भारतीय, कौन विदेशी! रंग से होगी पहचान, DL बनवाने के नियम भी होंगे सख्त

    अब ड्राइविंग लाइसेंस से पता चलेगा कौन भारतीय, कौन विदेशी! रंग से होगी पहचान, DL बनवाने के नियम भी होंगे सख्त


    केंद्र सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा; राष्ट्रीयता का उल्लेख, अलग रंग की व्यवस्था, 75 प्रतिशत पासिंग अंक और ब्लड ग्रुप समेत कई जानकारियां देने की तैयारी

    📢 We News 24 Digital News / वी न्यूज 24 डिजिटल

     रिपोर्ट : गौतम कुमार  | स्थान: नई दिल्ली | प्रकाशित: 22 अक्टूबर 2026


    नई दिल्ली। देश में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने और उससे जुड़ी सेवाओं के नियमों में बड़े बदलाव हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने एक ऐसा प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके लागू होने के बाद ड्राइविंग लाइसेंस देखकर ही यह पता लगाया जा सकेगा कि उसका धारक भारतीय नागरिक है या विदेशी।

    सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर ड्राइविंग लाइसेंस पर राष्ट्रीयता का उल्लेख करने और भारतीय तथा विदेशी नागरिकों के लिए अलग-अलग रंग की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव रखा है।

    इसके अतिरिक्त लाइसेंस बनवाने के लिए जरूरी दस्तावेजों, ऑनलाइन सुरक्षित ड्राइविंग मूल्यांकन, आपातकालीन संपर्क विवरण और कुछ ऑनलाइन सेवाओं की फीस में भी बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।

    हालांकि ये नियम अभी प्रस्ताव के स्तर पर हैं। अंतिम अधिसूचना जारी होने और लागू होने की तारीख निर्धारित होने के बाद ही नई व्यवस्था प्रभावी होगी।


    भारतीय और विदेशी नागरिकों के ड्राइविंग लाइसेंस का रंग होगा अलग

    सरकार के प्रस्ताव का सबसे चर्चित हिस्सा ड्राइविंग लाइसेंस पर धारक की राष्ट्रीयता दर्ज करने की व्यवस्था है।

    प्रस्ताव के अनुसार, भारतीय और विदेशी नागरिकों के ड्राइविंग लाइसेंस में अलग-अलग रंग की योजना अपनाई जा सकती है।

    इसका उद्देश्य लाइसेंस पर उपलब्ध जानकारी को अधिक स्पष्ट बनाना और लाइसेंसिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना बताया जा रहा है।

    हालांकि भारतीय और विदेशी नागरिकों के लिए कौन-कौन से रंग निर्धारित किए जाएंगे, इसकी अंतिम जानकारी लागू होने वाले नियमों से स्पष्ट होगी।


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    DL बनवाने के लिए 60 नहीं, 75 प्रतिशत अंक लाने होंगे?

    ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े प्रस्तावों में सुरक्षित ड्राइविंग के ऑनलाइन मूल्यांकन को भी अधिक सख्त बनाने की बात कही गई है।

    मंत्रालय ने ऑनलाइन 'सेफ-ड्राइविंग ट्यूटोरियल असेसमेंट' में उत्तीर्ण होने के लिए जरूरी अंकों को 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है।

    इसका उद्देश्य आवेदकों में सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों और जिम्मेदार वाहन संचालन के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

    यह बदलाव विशेष रूप से प्रस्तावित ऑनलाइन मूल्यांकन से संबंधित है। इसे सभी प्रकार की ड्राइविंग परीक्षाओं के लिए एक समान नया पासिंग मानदंड नहीं समझना चाहिए।


    ब्लड ग्रुप और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट की जानकारी देने का प्रस्ताव

    नए ड्राफ्ट में ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन के दौरान कुछ अतिरिक्त जानकारियां उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

    इनमें आवेदक का ब्लड ग्रुप, मोबाइल नंबर और आपातकालीन संपर्क विवरण शामिल हैं।

    आपात स्थिति या सड़क दुर्घटना के दौरान संपर्क विवरण उपलब्ध होने से संबंधित अधिकारियों को परिवार या अन्य नामित व्यक्ति से संपर्क करने में सहायता मिल सकती है।

    हालांकि इन जानकारियों के उपयोग, सत्यापन और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा से संबंधित अंतिम व्यवस्था लागू नियमों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।


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    पते के प्रमाण के लिए कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे?

    मंत्रालय ने पते, आयु और पहचान के प्रमाण के लिए दस्तावेजों की अलग-अलग सूची प्रस्तावित की है।

    पते के प्रमाण के लिए आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ई-राशन कार्ड तथा हाल के बिजली या गैस बिल जैसे दस्तावेजों को शामिल करने का प्रस्ताव है।

    विदेशी नागरिकों के मामले में भारत में उनके वैध रूप से रहने से संबंधित दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है।

    इस व्यवस्था का उद्देश्य दस्तावेजों की जांच को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाना है।

    उम्र और पहचान के लिए भी तय होंगे दस्तावेज

    आयु प्रमाण के लिए पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल बोर्ड की मार्कशीट और पात्र सरकारी विभागों द्वारा जारी पहचान पत्र जैसे दस्तावेज प्रस्तावित सूची में शामिल हैं।

    पहचान प्रमाण के लिए आधार, पासपोर्ट, पैन कार्ड और ई-राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है।

    आवेदकों को अंतिम नियम लागू होने के बाद संबंधित लाइसेंसिंग प्राधिकरण की अद्यतन सूची के अनुसार दस्तावेज जमा करने होंगे।


    क्या अब शपथ-पत्र से ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनेगा?

    सरकार ने दस्तावेजों के स्थान पर दिए जाने वाले शपथ-पत्रों के उपयोग को सीमित करने का प्रस्ताव रखा है।

    मंत्रालय का उद्देश्य ऐसे मामलों को कम करना है, जिनमें गलत या अप्रमाणित जानकारी के आधार पर आवेदन किए जाने की आशंका रहती है।

    हालांकि प्रस्ताव में यह भी व्यवस्था बताई गई है कि यदि आवेदक निर्धारित दस्तावेजों में से कोई उपलब्ध नहीं करा पाता है, तो संबंधित लाइसेंसिंग प्राधिकरण कुछ परिस्थितियों में सक्षम मजिस्ट्रेट या नोटरी के समक्ष दिए गए शपथ-पत्र को स्वीकार कर सकता है।

    इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सभी परिस्थितियों में शपथ-पत्र पूरी तरह समाप्त कर दिए जाएंगे।


    आधार से ऑनलाइन सत्यापन कराने पर कुछ सेवाएं हो सकती हैं मुफ्त

    ड्राइविंग लाइसेंस में नाम, पता या संपर्क विवरण बदलवाने जैसी कुछ सेवाओं के लिए शुल्क में छूट देने का प्रस्ताव भी सामने आया है।

    प्रस्ताव के अनुसार, कुछ सेवाओं में ऑनलाइन आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से आवेदन करने पर फीस माफ की जा सकती है।

    इससे पात्र आवेदकों को समय और खर्च दोनों की बचत हो सकती है।

    हालांकि किन सेवाओं पर कितनी छूट मिलेगी और इसके लिए कौन-सी शर्तें लागू होंगी, इसकी पुष्टि अंतिम अधिसूचना से होगी।


    पुराने ड्राइविंग लाइसेंस वालों को क्या करना होगा?

    इस खबर के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों के पास पहले से ड्राइविंग लाइसेंस है, क्या उन्हें नया लाइसेंस बनवाना पड़ेगा?

    फिलहाल उपलब्ध प्रस्तावित जानकारी के आधार पर सभी पुराने ड्राइविंग लाइसेंस तत्काल बदलवाना अनिवार्य होने की पुष्टि नहीं होती।

    सरकार द्वारा अंतिम नियम जारी किए जाने पर ही यह स्पष्ट होगा कि नई व्यवस्था केवल नए लाइसेंस, नवीनीकरण या मौजूदा लाइसेंस धारकों पर भी लागू होगी।

    इसलिए वाहन चालकों को किसी अफवाह के आधार पर नया लाइसेंस बनवाने या अनावश्यक शुल्क जमा करने की जरूरत नहीं है।


    WE NEWS 24 विश्लेषण: क्या नई व्यवस्था से फर्जी लाइसेंस पर लगेगी रोक?

    ड्राइविंग लाइसेंस में राष्ट्रीयता, पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन की व्यवस्था मजबूत करने का उद्देश्य फर्जी दस्तावेजों के उपयोग को रोकना और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाना हो सकता है।

    लेकिन इन बदलावों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नियमों को लागू करते समय आम नागरिकों को कितनी सुविधा मिलती है।

    विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, बुजुर्ग आवेदकों और डिजिटल सेवाओं का सीमित उपयोग करने वाले लोगों के लिए वैकल्पिक आवेदन प्रक्रिया उपलब्ध रहना महत्वपूर्ण होगा।

    इसके अतिरिक्त आवेदकों के व्यक्तिगत विवरण और आपातकालीन संपर्क जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा।

    केंद्र सरकार के प्रस्तावित बदलावों से ड्राइविंग लाइसेंस की पहचान और आवेदन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण परिवर्तन संभव हैं। लेकिन अंतिम अधिसूचना आने तक इन्हें लागू नियम मानना सही नहीं होगा।

    WE NEWS 24 | नई दिल्ली 

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