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    कानून की किताब से ,जाने दूसरी पत्नी और उसके बच्चों के संपत्ति में क्या है कानूनी अधिकार



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    We News 24» रिपोर्टिंग / दीपक कुमार 

    नमस्कार मै हु दीपक कुमार और आज हम लेकर आये  है भारत के कानून व्यस्थता में दूसरी पत्नी और उसके बच्चों के संपत्ति में क्या है कानूनी अधिकार तो आइये जानते है इसके बारे में 

    भारत में हिन्दू समुदाय में दूसरे विवाह को अपराध माना गया और भारतीय दंड संहिता की धारा 494 में पहली पत्नी के रहते हुए दूसरा विवाह करना दंडनीय अपराध माना गया है। इसके बाद भी भारत में कुछ प्रथाओं के अंतर्गत दूसरी शादी को मान्यता दी गई है। कानून के प्रतिबन्ध  के बाद भी दूसरी शादी के अनेको मामले देखने को मिलता है . और आगे चलकर  विवाद की  स्थिति उत्पन्न हो जाती है की दूसरी शादी जिस महिला से की गई है उस महिला के पति पर क्या अधिकार होंगे और उससे जो संतान पैदा होगा उनके अधिकार क्या होंगे।  


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    तो आइये जानते है क़ानूनी प्रावधान अगर किसी व्यक्ति की पहली पत्नी मर चुकी है या उसकी पहली पत्नी से उसका तलाक हो गया है, तब कानून दूसरी शादी करने का इजाजत देता है  लेकिन पहली पत्नी जीवित है, या तलाक नहीं हुआ है, उसके बाद किसी व्यक्ति द्वारा दूसरा विवाह कर लिया तब दूसरी पत्नी को विवाह हिंदू मैरिज एक्ट,1955 और विशेष विवाह अधिनियम,1956 दोनों के अंतर्गत अवैध मानकर इसे शून्य विवाह के श्रेणी में रखा गया है  है। लेकिन कानून इस मामले में एक महिला और बच्चों के प्रति उदार है।


    कानून का मानना है की बच्चे प्रकृति की देन है, किसी भी बच्चे के पैदा होने में उसका कोई भी हाथ नहीं होता न ही उसका कोई निर्णय होता है। अगर किसी अवैध शादी से बच्चा पैदा हो गया है, दूसरी पत्नी और उनके बच्चे  को भी कानून ने कुछ  हक़ अधिकार दिए हैं। इस दूसरी पत्नी को अपने पति से भरण-पोषण प्राप्त करने का पूरा अधिकार है,  कानून यहां पर उस दूसरी पत्नी को पति की स्वयं अर्जित संपत्ति या उसकी पैतृक संपत्ति के हिस्से में या उसकी किसी अन्य पैतृक संपत्ति में कोई भी कानूनी अधिकार नहीं देता है। 

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     अगर उसके पति की मौत हो जाती है और उसके पति ने कोई संपत्ति स्वयं से अर्जित की है या उसके पति को अपने परिवार से पैतृक संपत्ति में कोई हिस्सा मिला है, तब उसकी दूसरी पत्नी को कोई अधिकार नहीं मिलता है। वह व्यक्ति अपने जीवित रहते  दूसरी पत्नी के हिस्से में कोई संपत्ति वसीयत दान के माध्यम से दे सकता है, लेकिन अगर वह बगैर कोई फैसला लिए मर जाता है, तब उसकी पत्नी न्यायालय में कोई क्लेम नहीं कर सकती कि वह उसकी उत्तराधिकारी है । 


     पति का उत्तराधिकार उसकी पहली पत्नी को ही मिलेगा जो उसकी वैध पत्नी है।लेकिन दूसरी पत्नी भरण पोषण मांग सकती है दूसरी पत्नी के मामले में कानून ने थोड़ा सा उदार रवैया रखा है। दूसरी पत्नी को भरण-पोषण का अधिकार दिया है। कोई भी दूसरी पत्नी अगर अपने पति से अलग रह रही है और ऐसे अलग रहने का कारण वाजिब है, तब दूसरी पत्नी न्यायालय में भरण पोषण के लिए मुकदमा चला  सकती है। मुकदमा दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 125 के अंतर्गत लाया जाता है या फिर घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के अंतर्गत लाया जाता है या फिर हिंदू मैरिज एक्ट के अंतर्गत भी मुकदमा चला सकता है। 


     दूसरी पत्नी के बच्चों के क्या है अधिकार 

    दूसरी पत्नी से कोई संतान जन्म लिया तो ऐसी संतान के प्रति भारतीय कानून व्यवस्था उदार है। एक बालक के पैदा होने में उसका अपना कोई हाथ नहीं है। इस सिद्धांत को मानते हुए हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 16 में दूसरी पत्नी से होने वाले बच्चों को वैध बच्चों की तरह ही अधिकार दिए गए है। जिस तरह से पहली पत्नी के  बच्चा को  अपने पिता की संपत्ति में विरासत के लिए अधिकार रखता है, इसी प्रकार से दूसरी पत्नी से हुए बच्चा भी संपत्ति में अधिकार रखता  हैं। 


    अगर उस व्यक्ति की मृत्यु बगैर कोई वसीयत किए हो जाती है या अपनी संपत्ति के संबंध में बगैर कोई निर्णय लिए हो जाती है, तब दूसरी पत्नी के बच्चे भी अपने अधिकार  के लिए न्यायालय में उसी तरीके से मुकदमा ला सकते हैं, जिस तरीके से पहली पत्नी के बच्चे लाते हैं। पैतृक संपत्ति में दूसरी पत्नी के बच्चों का अधिकार पहली पत्नी से होने वाले बच्चों की तरह ही होता है। अंतर केवल इतना है कि उनके पिता को पैतृक संपत्ति में कोई हिस्सा मिला था और पिता की मृत्यु हो जाती है, तब वह अपने हिस्से की मांग कर सकते हैं, उन्हें पैतृक संपत्ति में मिले हिस्से में से भी उसका अधिकार  मिलेगा  लेकिन ध्यान देने योग्य बात यह है कि पैतृक संपत्ति में उत्तराधिकार तब ही मिलता है जब उसके पिता को पैतृक संपत्ति में कोई हिस्सा मिल गया हो। तभी उसे उसका अधिकार मिलेगा .

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