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    मध्यप्रदेश के लॉ एंड ऑर्डर की उड़ा रखी है धज्जियां गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ,व्यापमं कांड में मंत्री के बेटे को क्यों बचा रहे हैं गृहमंत्री




    • प्रदेश के लॉ एंड ऑर्डर की धज्जियां उड़ा रखी है गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा
    • कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के बजाय वेवजह विषयों पर टीका-टिप्पणी करते हैं नरोत्तम
    • व्यापमं कांड में मंत्री गोविंद राजपूत के बेटे को क्यों बचा रहे हैं नरोत्तम?


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    We News 24 Digital»रिपोर्टिंग सूत्र विजया पाठक 


    मध्यप्रदेश : में कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। यहां अपराधियों को न तो कानून का भय है और न ही सरकार का। यही वजह है कि प्रदेश में आये दिन लूट, बलात्कार, चोरी, डकैती, मारपीट, खून जैसी अनेकों घटनाएं हो रही हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि जिस कानून व्यवस्था को दुरस्त करने की जिम्मेदारी प्रदेश के गृहमंत्री और पुलिस की है वह इस समय मूकदर्शक बने बैठे हुए हैं। आलम यह है कि प्रदेश में कहीं आदिवासियों पर तो कहीं महिलाओं पर निरंतर अत्याचार हो रहे हैं और मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा हर घटना के बाद केवल बयानों के माध्यम से जांच कराने के निर्देश देते हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का मौन भी सरकार और गृहमंत्री की अकर्मणता मध्यप्रदेश की जनता के लिए भारी पड़ता जा रहा है। वे जनता की चिंता से कोसों दूर हैं और सिर्फ विपक्ष पार्टी और उनके नेताओं पर बयानबाजी करने पर फोकस कर रहे हैं।


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    गरीब का आशियाना उजाड़ते हैं और अमीर, मंत्री पुत्र को देते हैं संरक्षण

    प्रदेश में बुलडोजर राजनीति ने भाजपा को जनता से दूर किया है और इसका श्रेय भी नरोत्तम मिश्रा को जाता है। जहां बुलडोजर मामा की छवि शिवराज के लिए भारी पड़ रही है वहीं कट्टरता से परिपूर्ण नरोत्तम की जमींदोज करने वाली राजनीति प्रदेश की जनता को पसंद नहीं आ रही। मध्‍यप्रदेश में इंसाफ लोगों का स्टेटस देखकर मिल रहा है। अगर आप मंत्री पुत्र हैं, आप भाजपा के कार्यकर्ता हैं, आप रहीस परिवार से आते हैं तो आपको क्लीनचिट मिल जाएगी। आप कोई बुलडोजर नहीं चलेगा वहीं कहीं आप गरीब या किसी संप्रदाय विशेष से आते हैं तो आपकी खैर नहीं। कैसे मंत्री नरोत्‍तमद मिश्रा ने अपने साथी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के पुत्र आदित्य गोविंद राजपूत को व्यापमं मामले में बिना जांच के क्लीनचिट दे दी। 


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    बात-बात में बुलडोजर से जमींदोज करने वाले मंत्री मिश्रा ने जबलपुर से भाजपा परिवार के और पूर्व एबीवीपी नेता रेपिस्ट शुभांग गोटिया के घर तरफ कोई बुलडोजर नहीं भेजा। वहीं इनकी अप्रोच सिवनी जिले में आदिवासी मॉबलिंचिंग वाले अभियुक्तों के प्रति रही है। नरोत्तम मिश्रा और सरकार का बुलडोजर लोगों की हैसियत, पार्टी के प्रति निष्ठा और जाति देखकर चलता है। वर्तमान समय में प्रदेश में जिस प्रकार से लॉ एंड कानून की धज्जियां उड़ी हुई हैं उसे देखते हुए मन में कई सवाल खड़े होते हैं। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री की आपसी खींचतान के चक्कर में मध्यप्रदेश की जनता क्यों भुगते?


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    मीडिया में बने रहना चाहते हैं मिश्रा, कमलनाथ और दिग्विजय से बाहर निकलें नरोत्तम मिश्रा

    प्रदेश में खस्ताहाल होती कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी सिर्फ गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की है। पिछले वर्ष की एनसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश में क्राइम रेट अन्य राज्यों की तुलना में काफी बढ़ा हुआ है। बढ़ते अपराधों के लिए जिम्मेदार प्रदेश के पुलिस प्रशासन को बताया गया है। अपराधियों के बुलंद होते हौंसले का एक कारण नरोत्तम मिश्रा की असफलता का उदाहरण है। जितना समय नरोत्तम मिश्रा कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के ऊपर बयानबाजी के लिए निकालते हैं अगर उसका आधा समय भी प्रदेश की कानून व्यवस्था को दुरस्त करने के लिए दें तो प्रदेश में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लग सकता है।


    सूत्रों के अनुसार गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा मीडिया में बने रहने के लिए योजना बनाकर काम कर रहे हैं। यही कारण है कि उन्होंने रोजाना सुबह 10 बजे मीडिया के कुछ पत्रकारों से मुलाकात और उन्हें बाइट देने का कार्य शुरू किया है। खास बात इसमें यह है कि कई बार नरोत्तम मिश्रा उन विषयों पर भी बयानबाजी कर देते हैं जिनसे मध्यप्रदेश की सरकार और यहां की जनता से कोई लेना देना ही नहीं होता है। पत्रकारों को बाइट देने और बयानबाजी के लिए मिश्रा के बंगले पर कई घंटों पत्रकारों को खड़े रहना पड़ता है।


    कानून व्‍यवस्‍था नही संभलती तो इस्तीफा दे गृहमंत्री

    प्रदेश में क्राइम स्तर किस हद तक बढ़ चुका हैं कि पिछले दिनों मंडला में चार लोगों की एक साथ गर्दन कांट दी गई। यही नहीं सांप्रदायिकता के नाम पर नीमच के एक बुजुर्ग को भाजपा नेता के पति ने थप्पड़ मार-मार कर जान से मार डाला। आये दिन प्रदेश की बेटियों और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और बालात्कार जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। अगर गृहमंत्री की आंखें इतना कुछ होने के बाद भी नहीं खुलती तो उन्हें तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे देना चाहिए। 

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