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    आकाशवाणी बालाघाट की शाम की सभा को रिले कर स्थानीय कार्यक्रमों से जनता को किया जा रहा वंचित






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    We News 24 Digital»रिपोर्टिंग सूत्र  मनोज चन्द्रवंशी


       छिन्दवाड़ा :-  विगत 28 वर्षों से बालाघाट ज़िले में आकाशवाणी, बहुजन हिताय बहुजन सुखाय के उद्देश्य को लेकर जनता की सेवा कर रही है। बालाघाट  अंचल और यहां के स्थानीय परिदृश्य को लेकर आकाशवाणी से कार्यक्रमो को स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। प्रातः वंदना, चिंतन, सदाबहार गीत, नमस्कार बालाघाट मैगज़ीन, महिला जगत और शाम को युववाणी, चौपाल, किसानवाणी, आपकी पसंद के फिल्मी गीत और फिल्मी गीतों पर आधारित फोन इन कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाता है। 

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    जिससे बालाघाट की पूरी जनता के अलावा 100 किलोमीटर की रेंज में बालाघाट से बाहर के श्रोता भी आकाशवाणी बालाघाट के कार्यक्रमों का आनन्द लेते हैं। इसके साथ ही स्कूल, कॉलेज, शिक्षण संस्थानों, व्यापारियों, दुकानदारों के विज्ञापन और जनता के बधाई संदेश सूचना को प्रेषित करने का एक सशक्त माध्यम है। प्रशासनिक कार्यक्रमो, सूचनाओं को भी आकाशवाणी के द्वारा ही प्रसारित किया जाता है। लोक अंचल के स्थानीय बोली भाषाओं के लिए लोकगीतों का समावेश भी लोकमंजरी और किसानवानी कार्यक्रम में किया जाता है। इन सभी सौगातों से आकाशवाणी, बालाघाट ज़िले को प्रफुल्लित करता आ रहा है। 

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    लेकिन विगत कुछ वर्षों से महानिदेशालय की दमनकारी  नीतियों के चलते मध्यप्रदेश के कई लोकल रेडियो स्टेशन के साथ- साथ अब बालाघाट आकाशवाणी को भी रिले सेंटर में परिवर्तित किया जा रहा है। पिछले साल तक दिन में तीन सभाओं को बालाघाट आकशवाणी के स्टूडियो से प्रसारित किया जाता था। लेकिन दोपहर की दूसरी सभा को भी बंद कर मात्र सुबह और शाम की सभा जारी की गई थी। अब फिर महानिदेशालय द्वरा बज्रपात करते हुए बालाघाट में शाम की सभा को विविध भारती प्रसारण सेवा के लिए रिले केंद्र में परिवर्तित करने के आदेश के तहत पालन किया जा रहा है।


     जिससे आकाशवाणी बालाघाट में स्थानीय कलाकारों, प्रस्तोताओं से रोजगार से वंचित किया जा रहा है। साथ ही बालाघाट और बालाघाट से बाहर के सुधी श्रोताओं को स्थानीय मनोरंजन से विमुख किया जा रहा है। इस संदर्भ में बालाघाट की जनता और जनप्रतिनिधियों से अपील की जाती है कि बालाघाट की इस अनमोल धरोहर को खत्म होने बचाने के लिए सार्थक उपाय किये जायें। 

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