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    Sarhul Festival 2023: सिमडेगा में हर्षो उल्लास के साथ मना सरहुल निकला विशाल शोभा यात्रा,जाने क्यों मनाया जाता है ये त्यौहार


    Sarhul Festival 2023: सिमडेगा में हर्षो उल्लास के साथ मना सरहुल निकला  विशाल शोभा यात्रा


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    We News 24 Digital News» रिपोर्टिंग सूत्र / दीपक कुमार

    सिमडेगा : में हर्षो उल्लास के साथ मनाया गया सरहुल त्यौहार सरहुल पर्व के मौके पर आदिवासी सरना समाज के द्वारा विशाल शोभा यात्रा निकाली गयी। शोभा यात्रा सलडेगा सरना स्थल से प्रारंभ होकर शहर के मुख्य पथ से होते हुए नीचे बाजार होते हुए महादेव सरना पूजा स्थल तक गयी। 


    Sarhul Festival 2023: सिमडेगा में हर्षो उल्लास के साथ मना सरहुल निकला  विशाल शोभा यात्रा


    इस क्रम में युवाओं एवं महिलाएं मांदर के थाप पर खूब झूमे। वहीं एक दूसरे पर अबीर उड़ायी तथा कुछ युवक पारम्परिक गीतों पर थिरकते रहे। वहीं कुछ लोग इस दौरान जय धर्म का उद्घोष करते रहे। शोभा यात्रा में गुमला के सरना समिति के सदस्यों ने भी हिस्सा लिया।  जिले  में प्रकृति का त्यौहार यानी कि सरहुल की शुरुआत गुरुवार से हो गई. सरहुल आदिवासियों का प्रमुख त्योहार माना जाता है. इस दिन आदिवासी समुदाय के लोग तालाब से मछली और केकड़ा पकड़ने का काम करते हैं. सरहुल के पहले दिन मछली के जल से अभिषेक किया जाता है और उस जल को  अभिषेक किए गए जल को घर में छिड़का जाता है. दूसरे दिन उपवास रखा जाता है. तीसरे दिन पाहन (पुजारी) उपवास रखते हैं. 

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    सरना पूजा स्थल पर सखुआ के फूलों की पूजा की जाती है. आदिवासी समाज के लोग धरती माता की पूजा किया करते हैं. भगवान और धरती माता से प्राथना करते हैं कि धरती पर मौजूद समस्त प्राणी और पेड़ पौधे स्वस्थ रहें. सभी जीव जंतुओं को दाना पानी मिलता रहे. बारिश ठीक से हो, ताकि हम खेती बाड़ी कर सकें.

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    पुजारी करते हैं ये भविष्यवाणी

    वही गांव के पुजारी बताते हैं कि इस सदियों से चली आ रही परंपरा को आदिवाशी समाज धार्मिक नियम धर्म से निभाते आ रहे हैं. आदिवासी जंगलों से जुड़े होते हैं. और प्राकृति से काफी नजदीक होते हैं. सरहुल के दिन से आदिवासी समाज कृषि का कार्य शुरू करते हैं. इस दिन से ही गेहू की नई फसलों की कटाई का काम शुरू किया जाता है. इस दिन गांव के पुजारी जिसे पाहन कहा जाता है, वो भविष्यवाणी करते हैं कि इस साल अकाल पड़ेगा या अच्छी बारिश होगी. परंपरा है कि पाहन मिट्टी के तीन बर्तन लेते हैं. फिर इन बर्तनों में ताजा पानी भर दिया जाता है. अगले दिन इन तीनों बर्तनों को बारी बारी से देखा जाता है. अगर पानी कम हो जाता है, तो माना जाता है कि बारिश कम होगी. यानी कि अकाल की संभावना होगी है. वहीं अगर पानी पहले जितना ही रहता है, तो ये माना जाता हैकि बारिश अच्छी होगी. 

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