🚨 भांडुप स्टेशन के बाहर मौत का यू-टर्न: BEST बस ने फुटपाथ पर मचाया कहर, 4 की मौत, 14 घायल
We News 24 : डिजिटल डेस्क »✍️ रिपोर्ट: अमित पाटिल 📺 न्यूज़ चैनल: वी न्यूज़ 24
नई दिल्ली / मुंबई। मुंबई के भांडुप (पश्चिम) रेलवे स्टेशन के बाहर सोमवार रात जो हुआ, उसने हर किसी को दहला दिया। स्टेशन से बाहर निकलते ही जहां रोज़ाना सैकड़ों लोग घर जाने की जल्दी में रहते हैं, वहीं एक BEST बस अचानक बेकाबू हो गई और फुटपाथ पर चल रहे राहगीरों को रौंदती चली गई। इस दर्दनाक हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 14 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, चीख-पुकार मच गई, लोग इधर-उधर भागने लगे और कुछ ही सेकंड में स्टेशन के बाहर का इलाका मातम में बदल गया।
यू-टर्न बना जानलेवा
पुलिस और BEST अधिकारियों के अनुसार, हादसा भांडुप स्टेशन के पास मौजूद एक तंग मोड़ पर हुआ। BEST की रूट नंबर 606 की बस यू-टर्न लेने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान बस पहले एक खंभे से टकराई और फिर सीधा फुटपाथ पर चढ़ गई। उस वक्त स्टेशन के बाहर यात्रियों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ मौजूद थी।
यह हादसा सोमवार रात करीब 10:05 बजे हुआ।
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संविदा ड्राइवर, वेट लीज बस
हादसे में शामिल बस विक्रोली डिपो की वेट लीज इलेक्ट्रिक एसी बस बताई जा रही है, जिसे BEST ने संविदा पर लिया हुआ था। बस चला रहा ड्राइवर 52 वर्षीय संतोष रमेश सावंत बताया जा रहा है, जिसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
पुलिस ने ड्राइवर के खिलाफ लापरवाही और तेज रफ्तार से वाहन चलाने के कारण मौत का मामला दर्ज किया है। वहीं BEST प्रशासन ने ड्राइवर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
BEST के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,
“हम यह जांच करेंगे कि ड्राइवर को बस चलाने की सही ट्रेनिंग दी गई थी या नहीं। अगर लापरवाही सामने आती है तो कड़ी कार्रवाई होगी।”
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तीन महिलाएं भी हादसे का शिकार
इस हादसे में जान गंवाने वालों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है—
- मानसी गुरव (45 वर्ष)
- प्रणिता रसम (31 वर्ष)
- सावंत (25 वर्ष)
घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है।
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सवाल वही, जवाब फिर नहीं
गौर करने वाली बात यह है कि यह हादसा कुर्ला बस दुर्घटना के ठीक एक साल बाद हुआ है, जिसमें 9 लोगों की जान चली गई थी। सवाल फिर वही उठ रहे हैं—
क्या शहर की सड़कों पर बसें सुरक्षित हैं?
क्या संविदा ड्राइवरों की ट्रेनिंग और निगरानी सिर्फ कागज़ों तक सीमित है?
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