सर्दियों में हाथ-पैर ठंडे रहना आम है या गंभीर बीमारी का संकेत? कब लें डॉक्टरी सलाह
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(स्वास्थ्य संवाददाता, वी न्यूज 24)
नई दिल्ली: सर्दियों का मौसम आते ही हाथ-पैर का ठंडा होना लगभग हर किसी के लिए एक सामान्य समस्या बन जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह "सामान्य" लगने वाली स्थिति कभी-कभी आपके शरीर के अंदर चल रही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की पहली चेतावनी भी हो सकती है? विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर गर्म वातावरण में भी आपके हाथ-पैर लगातार ठंडे रहते हैं या उनमें रंग परिवर्तन दिखे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली: 'वासोकंस्ट्रिक्शन'
दरअसल, ठंड में हाथ-पैर का ठंडा होना शरीर की एक चतुर प्राकृतिक रक्षा प्रक्रिया है। फोर्टिस हॉस्पिटल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय गुप्ता बताते हैं, "जब बाहर का तापमान गिरता है, तो शरीर का पहला लक्ष्य अपने महत्वपूर्ण अंगों—दिमाग, हृदय, फेफड़े—को गर्म और सुरक्षित रखना होता है। इसके लिए शरीर परिधीय रक्त वाहिकाओं (खासकर हाथ-पैरों में) को सिकोड़ देता है। इस प्रक्रिया को 'वासोकंस्ट्रिक्शन' कहते हैं। इससे रक्त प्रवाह मुख्य रूप से कोर अंगों की ओर केंद्रित हो जाता है, और हाथ-पैरों तक रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे वे ठंडे, पीले या नीले पड़ सकते हैं।"
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इस दौरान हृदय को शरीर में रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे रक्तचाप और हृदय गति में वृद्धि हो सकती है।
कब बन सकती है यह गंभीर समस्या का संकेत?
सामान्य ठंड और चिंताजनक लक्षणों के बीच अंतर समझना जरूरी है। अगर आपके हाथ-पैर बिना किसी स्पष्ट कारण या गर्म माहौल में भी लगातार ठंडे रहते हैं, तो यह निम्नलिखित अंतर्निहित स्थितियों का संकेत हो सकता है:
- हृदय संबंधी समस्याएं: उच्च रक्तचाप, निम्न रक्तचाप, हृदय रक्त धमनी रोग, या परिधीय धमनी रोग (पीएडी)।
- चयापचय संबंधी विकार: हाइपोथायरायडिज्म (थायराइड की कमी) या मधुमेह, जो नसों और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकता है।
- रक्त की कमी (एनीमिया): शरीर में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की कमी होना।
- रेनॉड रोग (Raynaud's Disease): यह एक विशेष स्थिति है जिसमें ठंड या तनाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील छोटी रक्त वाहिकाएं ऐंठ जाती हैं, जिससे प्रभावित अंग सफेद, फिर नीले और बाद में लाल हो जाते हैं। इसमें दर्द और सुन्नता भी हो सकती है।
- दवाओं के दुष्प्रभाव: बीटा-ब्लॉकर्स जैसी कुछ दवाएं रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ सकती हैं।
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बचाव के उपाय और सावधानियां
सर्दियों में बेहतर रक्त परिसंचरण और गर्मी बनाए रखने के लिए आप ये उपाय अपना सकते हैं:
उचित परिधान: हमेशा दस्ताने, गर्म मोजे और टोपी पहनें। सावधानी: ठंडे हाथों-पैरों को सीधे हीटर या गर्म पानी पर न रखें, इससे जलन या त्वचा क्षति हो सकती है।
नियमित व्यायाम: चलना, दौड़ना या योग जैसी शारीरिक गतिविधियाँ रक्त प्रवाह बढ़ाने में मदद करती हैं।
स्वस्थ आहार: आयरन, विटामिन बी12 और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर संतुलित आहार लें। धूम्रपान से पूरी तरह परहेज करें, क्योंकि यह रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है।
तनाव प्रबंधन: विशेष रूप से रेनॉड रोग से पीड़ित लोगों के लिए तनाव कम करना महत्वपूर्ण है।
डॉक्टर से कब संपर्क करें?
अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें:
गर्मी में भी हाथ-पैर का लगातार ठंडा रहना।
त्वचा का रंग सफेद, नीला या धब्बेदार हो जाना।
हाथ-पैरों में लगातार सुन्नता, झनझनाहट, तेज दर्द या अल्सर (घाव) बनना।
डॉ. गुप्ता सलाह देते हैं, "यह समझना जरूरी है कि शरीर के ये संकेत कब सामान्य हैं और कब नहीं। नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली इन समस्याओं से बचाव की पहली सीढ़ी है।"
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