पाकिस्तान की धरती से बन रही है भारत में आतंकी हमले की साजिश? हमास और लश्कर कमांडरों की 'सीक्रेट मीटिंग'
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रिपोर्ट: राजीव नंदा (वरिष्ठ रक्षा एवं सुरक्षा विश्लेषक), वी न्यूज 24
नई दिल्ली/इस्लामाबाद: भारतीय खुफिया एजेंसियों को एक बेहद गंभीर और चिंताजनक ख़ुफ़िया जानकारी हाथ लगी है। आंतकवाद पर नज़र रखने वाले कई अंतरराष्ट्रीय स्रोतों और भारतीय एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के क्वेटा इलाके में हाल ही में एक गुप्त बैठक हुई, जिसमें पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (लेट) और फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास के कमांडरों ने हिस्सा लिया।
इस बैठक का मकसद क्या था? सूत्र बताते हैं कि इस मुलाकात में भारत के खिलाफ संभावित आतंकी हमलों की रूपरेखा तैयार करना और फंडिंग के नए रास्ते बनाना प्रमुख एजेंडे में शामिल था। यह जानकारी उस वक्त और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जब भारत सुरक्षा एजेंसियाँ गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) से पहले सुरक्षा तैयारियों में जुटी हुई हैं।
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क्या हुई बैठक में?
सूत्रों के अनुसार, इस गुप्त मुलाकात में लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष कमांडर, जिसे 'मुफ्ती अशरफ' के नाम से जाना जाता है और हमास के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि, जो इराक और सीरिया में संगठन के फंडिंग नेटवर्क से जुड़ा है, शामिल हुए। भारतीय एजेंसियों का मानना है कि यह मुलाकात दोनों आतंकी गुटों के बीच रणनीतिक सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने की कोशिश है।
एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हमारे पास ऐसे संकेत कई हफ्तों से हैं कि पाकिस्तान में बैठे आतंकी गुट, मध्य पूर्व के संगठनों से संपर्क बढ़ा रहे हैं। यह बैठक इसी रणनीति का हिस्सा लगती है। हमास के पास फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का अनुभव है, जबकि लश्कर के पास भारत में घुसपैठ और हमले करने का इलाकाई ज्ञान और मैनपावर है। दोनों का यह गठजोड़ भारत के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।"
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भारत की तैयारी और चुनौती
इस खुफिया जानकारी के बाद भारतीय सुरक्षा तंत्र पूरी सतर्कता के साथ कार्य कर रहा है। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने समुद्री तटों, हवाई अड्डों और सीमावर्ती इलाकों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, गुजरात और राजस्थान जैसे सीमावर्ती राज्यों को अलर्ट पर रखा गया है।
हालाँकि, सबसे बड़ी चुनौती क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाली फंडिंग को ट्रेस करने की है। हमास ऐसी डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल में माहिर माना जाता है। सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. अरुण सचदेवा कहते हैं, "यह ख़बर अगर सही है, तो यह आतंकवाद के नए रूप की ओर इशारा करती है। अब आतंकी संगठन किसी एक भू-भाग तक सीमित नहीं हैं। वे एक वैश्विक नेटवर्क बना रहे हैं, जहाँ आइडियोलॉजी, फंडिंग और ट्रेनिंग का आदान-प्रदान होता है। भारत को अपनी साइबर और फिनांशियल इंटेलिजेंसी को और मजबूत करने की जरूरत है।"
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पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल पाकिस्तान की भूमिका पर उठ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान हमेशा खुद को आतंकवाद से लड़ने वाला देश बताता है, लेकिन भारत लगातार आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तानी धरती पर लश्कर जैसे संगठनों को पनपने और साजिशें रचने की छूट दी जाती है। यह गुप्त बैठक इसी आरोप को फिर से मजबूती देती है।
नोट: यह रिपोर्ट खुफिया सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद निगरानी समूहों की जानकारी पर आधारित है। संबंधित सुरक्षा एजेंसियाँ इस मामले की पुष्टि या खंडन नहीं करती हैं और जाँच जारी है। आम जनता से अनुरोध है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या सुरक्षा हेल्पलाइन नंबर 1090 या 112 पर दें।
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