‘विवादित नारे लगाने वाले सभी छात्र हो सकते हैं सस्पेंड’, जेएनयू प्रशासन ने अपनाया कड़ा रुख
We News 24 : डिजिटल डेस्क »✍️वी न्यूज 24 | रिपोर्ट: रवि कुमार
नई दिल्ली | जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी के मामले में सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है और दोषी छात्रों को तत्काल निलंबन या निष्कासन का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय नवाचार के केंद्र हैं और उन्हें नफरत की प्रयोगशाला नहीं बनने दिया जाएगा। अनुशासन और संवैधानिक गरिमा बनाए रखना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है।
जेएनयू के सबरमती ढाबा की वह सड़क, जहां प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ नारे गूंजे, एक बार फिर लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की सीमा और मर्यादा को लेकर बहस के केंद्र में आ गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिसे कुछ छात्र आज़ादी समझ रहे हैं, वह कानून की नजर में स्वीकार्य नहीं है और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार 5 जनवरी 2020 की हिंसा की छठी बरसी के मौके पर करीब 30 से 35 छात्र सबरमती हॉस्टल के बाहर एकत्र हुए थे। इसी दौरान उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर आए न्यायिक फैसलों के बाद वहां उकसाने वाले नारे लगाए गए। प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट का अनादर और विश्वविद्यालय की आचार संहिता का उल्लंघन माना है।
जेएनयू प्रशासन ने मंगलवार को कहा कि जांच के आधार पर दोषी छात्रों को विश्वविद्यालय से निलंबित, निष्कासित या स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया जा सकता है। इस मामले में पुलिस को औपचारिक शिकायत भेजकर एफआईआर दर्ज कराई गई है।
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प्रशासन की शिकायत में कुछ छात्रों की पहचान की गई है, जिनमें अदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद अजमी, महबूब इलाही, कनिष्क, पकीजा खान और शुभम शामिल हैं। घटना के समय सुरक्षा निरीक्षक गोरखनाथ, सुपरवाइजर विशाल कुमार और गार्ड जय कुमार मीणा व पूजा मौके पर मौजूद थे और उन्हें गवाह बनाया गया है।
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