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✍️न्यूज रिपोर्टर: राहुल मेहरोत्रा,नई दिल्ली, | 25 जनवरी 2026
नई दिल्ली, 25 जनवरी 2026 :- है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार EU से आयात होने वाली कारों पर लगने वाले भारी-भरकम टैरिफ को 110 फीसदी से घटाकर सीधे 40 फीसदी करने जा रही है। इसे भारतीय ऑटो बाजार को खोलने की अब तक की सबसे बड़ी पहल माना जा रहा है। समझौता अगले कुछ दिनों में फाइनल हो सकता है और दोनों पक्ष औपचारिक मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करेंगे।
किन कारों पर तुरंत लागू होगी छूट?
रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में 15,000 यूरो (करीब 17,700 डॉलर) से ऊपर कीमत वाली चुनिंदा पेट्रोल और डीजल कारों पर यह कम टैरिफ तुरंत लागू होगा। इससे मर्सिडीज-बेंज, BMW, ऑडी और वोक्सवैगन जैसी यूरोपीय लग्जरी कार कंपनियों को भारतीय बाजार में घुसने का सुनहरा मौका मिलेगा।
धीरे-धीरे 10% तक आएगा टैरिफ
सूत्रों ने बताया कि 40 फीसदी की यह दर स्थायी नहीं रहेगी। आने वाले वर्षों में इसे चरणबद्ध तरीके से और घटाकर 10 फीसदी तक लाया जाएगा। मकसद यह है कि घरेलू ऑटो इंडस्ट्री पर अचानक दबाव न पड़े और बाजार धीरे-धीरे खुलता रहे।
‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ – दोनों पक्षों की नजर
भारत और EU इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कह रहे हैं। इससे द्विपक्षीय व्यापार में नई रफ्तार आएगी। भारत के टेक्सटाइल, ज्वेलरी और श्रम-प्रधान उद्योगों को खास फायदा होगा, जो हाल में अमेरिकी टैरिफ के कारण दबाव में थे।
भारतीय ऑटो सेक्टर अब तक सबसे सुरक्षित
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, लेकिन आयातित कारों पर 70 से 110 फीसदी तक टैरिफ लगता रहा है। इसी वजह से यूरोपीय कंपनियों की हिस्सेदारी महज 4 फीसदी से भी कम है। टेस्ला के CEO एलन मस्क भी कई बार भारत के ऊंचे टैरिफ की आलोचना कर चुके हैं। अब यह कदम उस आलोचना का सीधा जवाब माना जा रहा है।
EV को पहले 5 साल तक राहत से बाहर
सरकार ने EV (इलेक्ट्रिक वाहन) पर संतुलन बनाए रखा है। बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों को पहले 5 साल तक टैरिफ कटौती से बाहर रखा जाएगा। इससे टाटा मोटर्स, महिंद्रा जैसी घरेलू कंपनियों के EV निवेश को सुरक्षा मिलेगी। 5 साल बाद EV पर भी समान छूट लागू होगी।
विदेशी कंपनियों को मिलेगा बाजार परखने का मौका
कम टैरिफ से यूरोपीय ब्रांड ज्यादा मॉडल लॉन्च कर सकेंगे और बाजार को बेहतर समझ पाएंगे। अभी भारत के 44 लाख यूनिट सालाना बाजार में सुजुकी, टाटा और महिंद्रा का दबदबा है। नई नीति से विदेशी कंपनियां बिना फैक्ट्री लगाए अपनी पकड़ मजबूत कर सकेंगी।
2030 तक 60 लाख यूनिट का बाजार
विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2030 तक भारत का कार बाजार 60 लाख यूनिट सालाना तक पहुंच सकता है। इसी संभावना को देखते हुए रेनो नई रणनीति के साथ वापसी कर रही है और वोक्सवैगन समूह स्कोडा के जरिए बड़ा निवेश प्लान कर रहा है।
यह समझौता भारतीय ऑटो सेक्टर की तस्वीर पूरी तरह बदल सकता है।
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