“ऑपरेशन सिंदूर से कांपा था पाकिस्तान, अमेरिका में 60 बैठकों की भीख — FARA दस्तावेजों ने खोल दी पोल”
We News 24 : डिजिटल डेस्क »✍️रिपोर्ट: रविकांत शुक्ला | डिफेंस एंड डिप्लोमेसी एडिटर, वी न्यूज 24
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अब एक ऐसा खुलासा सामने आया है, जिसने पाकिस्तान की कूटनीति, उसकी घबराहट और उसकी अंतरराष्ट्रीय दोहरी नीति — तीनों को बेनकाब कर दिया है। अमेरिका के विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (FARA) के तहत दर्ज सरकारी दस्तावेजों से साफ हो गया है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद और ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से ठीक पहले पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में जबरदस्त लॉबिंग अभियान चलाया था।
मकसद एक ही था —
किसी भी कीमत पर भारत की सैन्य कार्रवाई को रुकवाना।
60 से ज्यादा बैठकों की कोशिश, पूरा सिस्टम झोंका
FARA रिकॉर्ड के मुताबिक अमेरिका में तैनात:
- पाकिस्तानी उच्चायुक्त
- राजनयिक अधिकारी
- और सैन्य प्रतिनिधि
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ने अमेरिका के सांसदों, पेंटागन, विदेश विभाग और बड़े मीडिया संस्थानों से संपर्क करने के लिए:
- ईमेल किए
- फोन कॉल किए
- आमने-सामने मुलाकातों की कोशिश की
कुल मिलाकर 50 से ज्यादा औपचारिक और 60 से अधिक अनौपचारिक बैठकों की पहल की गई।
ऑपरेशन सिंदूर से क्यों बौखलाया पाकिस्तान?
सूत्र बताते हैं कि पाकिस्तान को इस बात की पूरी आशंका थी कि:
पहलगाम हमले के बाद भारत इस बार सिर्फ बयानबाज़ी नहीं करेगा, बल्कि सीधी और निर्णायक सैन्य कार्रवाई करेगा।
इसी डर से पाकिस्तान ने अमेरिका को बीच में डालने की पूरी कोशिश की।
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हर मीटिंग में कश्मीर का राग
इन बैठकों में पाकिस्तान ने:
- कश्मीर मुद्दा
- सीमा पर हालात
- भारत-पाक तनाव
- क्षेत्रीय स्थिरता
- और यहां तक कि रेयर अर्थ मिनरल्स जैसे विषयों को भी जबरन घसीटा
ताकि एक नैरेटिव बनाया जा सके कि:
“भारत की कार्रवाई से पूरा दक्षिण एशिया अस्थिर हो सकता है।”
45 करोड़ रुपये की लॉबिंग, वॉशिंगटन में छवि चमकाने की कोशिश
नवंबर 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने:
अमेरिका की एक लॉबिंग फर्म को करीब 5 मिलियन डॉलर (लगभग 45 करोड़ रुपये) दिए।
यह रकम सिर्फ और सिर्फ:
- कांग्रेस
- अमेरिकी प्रशासन
- और मीडिया पर प्रभाव बनाने के लिए खर्च की गई।
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ट्रंप को साधने की रणनीति
दस्तावेज बताते हैं कि पाकिस्तान ने:
- जेवलिन एडवाइजर्स के जरिए
- सेडेन लॉ एलएलपी से डील की
इसके कुछ ही समय बाद:
- ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पाकिस्तानी आर्मी चीफ असीम मुनीर का स्वागत किया
- पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की बात तक कह दी
- साथ ही व्यापार और निवेश के बड़े-बड़े वादे भी किए गए
दुनिया के सामने फिर बेनकाब हुई पाकिस्तानी नीति
डिप्लोमेसी के जानकार कहते हैं:
“ये दस्तावेज साबित करते हैं कि पाकिस्तान आतंक का समर्थक भी है और डरपोक लॉबिस्ट भी।”
भारत की रणनीति: न शोर, न सौदेबाज़ी — सिर्फ कार्रवाई
दिलचस्प बात ये है कि इन सब दबावों के बावजूद:
भारत ने न तो कोई सफाई दी, न कोई सौदा किया — और ऑपरेशन सिंदूर अपने तय समय और तय तरीके से हुआ।
निष्कर्ष
FARA दस्तावेजों ने ये साफ कर दिया है कि:
पाकिस्तान को भारत की ताकत से ज्यादा डर, अब भारत के इरादों से लगने लगा है।
और यही ऑपरेशन सिंदूर की सबसे बड़ी रणनीतिक जीत है।
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