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    👩‍🦰 बिहार में महिलाओं को 10 हजार देने वाली योजना बंद! चुनावी लोलीपोप थी या आत्मनिर्भरता मिशन?

    बिहार में महिलाओं को 10 हजार देने वाली योजना बंद! चुनावी लोलीपोप थी या आत्मनिर्भरता मिशन?



    We News 24 : डिजिटल डेस्क »✍️रिपोर्ट: अमिताभ मिश्रा | पटना ब्यूरो, वी न्यूज 24


    पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर वही पुराना सवाल तैरने लगा है — क्या सरकार की बड़ी योजनाएं सिर्फ चुनाव तक ही जिंदा रहती हैं? वजह है मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना, जिसके तहत महिलाओं को 10-10 हजार रुपये देने की स्कीम की नई एंट्री 31 दिसंबर के बाद बंद कर दी गई है और आवेदन का पोर्टल भी क्लोज कर दिया गया है।

    यही वही योजना है, जिसे बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की बंपर जीत का ‘गेमचेंजर’ माना गया था।


     अब तक कितनी महिलाओं को मिला पैसा?

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक:

    1. अब तक 1 करोड़ 56 लाख महिलाओं के खाते में
    2. 10-10 हजार रुपये यानी कुल हजारों करोड़ की राशि
    3. डायरेक्ट ट्रांसफर की जा चुकी है

    इसके बाद भी:

    1. करीब 19 लाख नए आवेदन पोर्टल पर आए
    2. लेकिन इसी बीच नई एंट्री बंद कर दी गई



     योजना क्या कहती है?

    मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत:

    1. हर पात्र महिला को पहले चरण में 10,000 रुपये
    2. और बाद में रोजगार/स्वरोजगार के लिए 2 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है।


     चुनाव में कैसे बदला माहौल?

    बिहार चुनाव के दौरान:

    1. महिला वोटिंग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई
    2. एनडीए को प्रचंड बहुमत मिला
    3. और सियासी गलियारों में माना गया कि

    “10 हजार वाली योजना ने गेम पलट दिया।”


     अब पोर्टल बंद, विपक्ष हमलावर

    अब जैसे ही पोर्टल बंद हुआ, विपक्ष ने सरकार पर सीधा हमला बोला है।

    विपक्ष का आरोप है:

    “ये योजना सिर्फ चुनावी लालच थी। वोट मिलते ही ताला लगा दिया गया।”



     मंत्री प्रमोद कुमार का जवाब

    नीतीश सरकार में सहकारिता मंत्री प्रमोद कुमार ने वी न्यूज 24 से बातचीत में कहा:

    “योजना बंद नहीं हुई है। विपक्ष बेवजह भ्रम फैला रहा है। ये योजना महिलाओं के स्वावलंबन के लिए है, चुनावी प्रोपगंडा नहीं।”

    उन्होंने आगे कहा:

    “कोई भी योजना का पोर्टल हमेशा खुला नहीं रहता। प्रधानमंत्री आवास योजना का पोर्टल भी हमेशा नहीं खुला रहता। हर योजना की एक सीमा होती है।”

    और फिर एक सियासी तंज भी जोड़ दिया:

    “उत्तर प्रदेश में योगी जी को किसने पैसा दिया था, जहां 325 सीटें आई थीं?”

     

     कब-कब भेजा गया पैसा?

    1. 30 अगस्त 2025 – नीतीश कैबिनेट ने योजना को मंजूरी दी
    2. 26 सितंबर 2025 – पीएम मोदी और सीएम नीतीश ने 75 लाख महिलाओं को 10-10 हजार भेजे
    3. 3 अक्टूबर 202525 लाख महिलाओं को भुगतान
    4. 28 नवंबर 2025 – आखिरी बार 10 लाख महिलाओं को पैसा मिला



     असली सवाल क्या है?

    आज बिहार की गली-चौपाल में लोग पूछ रहे हैं:

    1. क्या जिन 19 लाख महिलाओं ने बाद में आवेदन किया, उनका क्या होगा?
    2. क्या ये योजना फिर खुलेगी या फाइलों में दफन हो जाएगी?
    3. और क्या वाकई ये स्कीम स्थायी नीति थी या चुनावी प्रयोग?

     

    जानकारों की राय

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है:

    “अगर सरकार इसे स्थायी योजना बताती है, तो पोर्टल बंद करना गलत संदेश देता है। इससे विपक्ष को हमला करने का पूरा मौका मिल गया है।”


     निष्कर्ष

    मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना ने बिहार की राजनीति में बड़ा असर डाला,
    लेकिन अब सवाल ये है:

    क्या ये योजना चुनाव तक की मेहमान थी, या सच में महिलाओं की किस्मत बदलने का मिशन?

    इसका जवाब आने वाले महीनों में मिलेगा। 



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