12 हजार फिट पर कौन पहुंचा रहा था आतंकी को राशन-कंबल-गैस सिलेंडर ?ड्रोन, हेलीकॉप्टर तलाश जारी
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किश्तवाड़ (जम्मू-कश्मीर)। जिला किश्तवाड़ के सिंहपोरा जंगल में आतंकियों के खिलाफ चल रहा बड़ा ऑपरेशन तीसरे दिन भी जारी है। सुरक्षाबल अब आतंकियों के मददगारों की तलाश में जुट गए हैं। जंगल की 12 हजार फीट ऊंचाई पर बने बंकरनुमा ठिकाने से इतना राशन, कंबल, दवाइयां, गैस सिलेंडर और अन्य सामान कैसे पहुंचा, इसकी पड़ताल की जा रही है। इस बीच कुछ स्थानीय लोगों को पूछताछ के लिए उठाया गया है।
ऑपरेशन रविवार से शुरू, एक जवान शहीद
रविवार को छात्रू के सिंहपोरा इलाके में शुरू हुए इस ऑपरेशन में आतंकियों ने गोलीबारी की थी। मुठभेड़ में पैरा कमांडो का एक जवान शहीद हो गया था और सात अन्य जवान घायल हुए थे। घायलों का इलाज सैन्य अस्पताल में चल रहा है। मामूली रूप से घायल जवान भी ऑपरेशन में डटे हुए हैं।
मुठभेड़ के बाद आतंकी घने जंगल में भाग निकले थे, लेकिन सुरक्षाबलों ने उनका एक बड़ा ठिकाना ध्वस्त कर दिया। इस ठिकाने से बड़ी मात्रा में राशन, सर्दियों के कंबल, ड्रम, दवाइयां, बर्तन, गैस सिलेंडर और अन्य सामान बरामद हुआ। बरामद सामान से साफ है कि आतंकी यहां कई महीनों तक रहने की तैयारी में थे।
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जैश के 3-4 आतंकी छिपे होने की आशंका
सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान समर्थित जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े तीन से चार आतंकी अभी भी जंगल में छिपे हो सकते हैं। गणतंत्र दिवस नजदीक होने के कारण सुरक्षाबल किसी भी तरह की चूक नहीं चाहते। इसलिए ऑपरेशन को और तेज कर दिया गया है।
वरिष्ठ अधिकारी मौके पर डटे
जम्मू जोन के पुलिस महानिरीक्षक भीम सेन टूटी और सीआरपीएफ जम्मू के महानिरीक्षक आर गोपाल कृष्ण राव खुद मौके पर पहुंचे हैं। दोनों अधिकारी क्षेत्र में ही डेरा डाले हुए हैं और ऑपरेशन की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।
सेना की व्हाइट नाइट कोर ने भी एक्स पर पोस्ट किया है कि ऑपरेशन त्राशी-1 जारी है। घेराबंदी को और सख्त कर दिया गया है और तलाशी अभियान का दायरा बढ़ा दिया गया है।
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ड्रोन, हेलीकॉप्टर और खोजी श्वान की मदद
सेना, पुलिस और केंद्रीय बलों की कई टीमें मिलकर ऑपरेशन चला रही हैं। दुर्गम जंगल और खड़ी ढलानों के कारण हर कदम संभलकर रखना पड़ रहा है। ड्रोन, हेलीकॉप्टर और खोजी श्वान भी तलाशी में मदद कर रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि ठिकाने से बरामद सामान कम से कम चार-पांच लोगों के लिए कई महीनों तक पर्याप्त था। आबादी से करीब सात किलोमीटर दूर यह ठिकाना था। अब सवाल यह है कि इतना भारी सामान इतनी ऊंचाई पर कौन और कैसे पहुंचा। संदेह के आधार पर कई लोगों से पूछताछ की जा रही है।
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