भारत के लिए फ्रांस बनेगा ‘नया रूस’? मुंबई पहुंचे मैक्रों, मोदी के साथ रणनीतिक वार्ता आज
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✍️रिपोर्ट: पत्रकार , अनिल पाटिल
उपशीर्षक
- तीन दिवसीय भारत दौरे पर फ्रांस के राष्ट्रपति
- रक्षा सहयोग में नई छलांग की उम्मीद
- राफेल, हैमर मिसाइल और सह-उत्पादन पर फोकस
📍 मुंबई/नई दिल्ली | राष्ट्रीय डेस्क
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों तीन दिवसीय भारत यात्रा पर मुंबई पहुंच चुके हैं। 17 से 19 फरवरी तक चलने वाले इस दौरे को भारत-फ्रांस संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। तेजी से गहराते रक्षा सहयोग के बीच यह चर्चा तेज है कि भारत के लिए फ्रांस अब “नया रूस” बनकर उभर रहा है।
रणनीतिक साझेदारी पर फोकस
राष्ट्रपति मैक्रों अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान दोनों नेता रक्षा, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को लेकर चर्चा करेंगे।
मंगलवार शाम को दोनों नेता संयुक्त रूप से “इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026” का उद्घाटन भी करेंगे।
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रक्षा क्षेत्र में फ्रांस की बढ़ती भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह दशकों तक रूस भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार रहा, उसी तरह अब फ्रांस दीर्घकालिक और भरोसेमंद सहयोगी के रूप में उभर रहा है।
हाल के वर्षों में राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद ने दोनों देशों के रक्षा संबंधों को नई मजबूती दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत द्वारा बड़ी संख्या में अतिरिक्त राफेल खरीद का फैसला इस साझेदारी को और मजबूत करेगा।
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सह-उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-फ्रांस रक्षा संबंध अब खरीददार-विक्रेता मॉडल से आगे बढ़कर सह-विकास और सह-उत्पादन की दिशा में बढ़ रहे हैं।
AI और नई तकनीकों में सहयोग
राष्ट्रपति मैक्रों भारत में आयोजित एआई समिट में भी हिस्सा लेंगे, जिससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।
दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ रहा है।
इंडो-पैसिफिक पर साझा रणनीति
विश्लेषकों के मुताबिक, यह दौरा भारत-फ्रांस संबंधों को नए युग में ले जा सकता है।
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रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार:
- दीर्घकालिक रक्षा सहयोग
- तकनीक हस्तांतरण
- संयुक्त उत्पादन
- राजनीतिक भरोसा
इन सभी कारणों से फ्रांस भारत के लिए एक नए रणनीतिक स्तंभ के रूप में उभर रहा है।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति मैक्रों का यह दौरा केवल एक औपचारिक कूटनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत और फ्रांस के बीच उभरते रणनीतिक गठबंधन का संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साझेदारी वैश्विक भू-राजनीति में भी अहम भूमिका निभा सकती है।
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