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    न सीधी बात, न समझौता! बंकर में कैबिनेट मीटिंग कर ईरान ने दिखाया अमेरिका को अपना कड़ा रुख

    न सीधी बात, न समझौता! बंकर में कैबिनेट मीटिंग कर ईरान ने दिखाया अमेरिका को अपना कड़ा रुख


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    रिपोर्टर: राहुल सिंह, सीनियर इंटरनेशनल कॉरेस्पॉन्डेंट, We News 24 (तेहरान से विशेष रिपोर्ट)


    नई दिल्ली /तेहरान, 31 मार्च 2026 – मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच चुका है। ईरान ने फारसी नव वर्ष (नौरोज) की पहली कैबिनेट बैठक किसी आलीशान सरकारी भवन में नहीं, बल्कि एक किलेबंद भूमिगत बंकर में आयोजित की। सरकारी मीडिया द्वारा जारी तस्वीरों में मंत्री कंक्रीट की मोटी दीवारों वाले सुरक्षित हॉल में बैठे नजर आए, जिसे देखकर सोशल मीडिया पर जंग की आहट तेज हो गई है।

    ईरानी अधिकारियों ने इस बैठक की जगह के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि संभावित हवाई हमलों और बढ़ते खतरे को देखते हुए तेहरान अब अपनी अहम बैठकों को पाताल लोक से चला रहा है। यह तस्वीर ईरान के कड़े रुख का साफ संकेत है – दबाव में झुकने के बजाय पूर्ण तैयारी के साथ टकराव का सामना करने की।



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    अमेरिका से कोई डायरेक्ट टॉक नहीं, सिर्फ मध्यस्थों के जरिए मैसेज

    बंकर मीटिंग के ठीक बाद ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई (Esmaeil Baghaei) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा – “अमेरिका के साथ अब तक कोई प्रत्यक्ष वार्ता नहीं हुई है। हमने केवल मध्यस्थों के माध्यम से कुछ मैसेज प्राप्त किए हैं।”

    बघाई ने अमेरिकी दावों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब वाशिंगटन कूटनीति की बात करता है तो उस पर भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकि अमेरिका के दावों की साख दुनिया भर में काफी कम हो चुकी है। ईरान का रुख पूरी तरह साफ और स्थिर है, जबकि अमेरिकी प्रशासन बार-बार अपने बयानों को बदल रहा है।




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    15 सूत्रीय प्लान को ‘तर्कहीन’ और ‘एकतरफा’ करार दिया

    प्रवक्ता बघाई ने बताया कि मध्यस्थों के जरिए जो प्रस्ताव आए हैं, उनमें एक कथित 15 सूत्रीय योजना भी शामिल है। ईरान ने इसे पूरी तरह अव्यावहारिक, अतिरंजित और तर्कहीन बताया है। इनमें ऐसी शर्तें रखी गई हैं जो ईरान की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ हैं। तेहरान ने साफ कर दिया है कि किसी भी दबाव में वह ऐसी शर्तें नहीं मानेगा।

    कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अमेरिका पर्दे के पीछे से दबाव बना रहा है, लेकिन बंकर की तस्वीरें बताती हैं कि ईरान अब झुकने की बजाय मजबूती से खड़ा होने की तैयारी कर चुका है।



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    क्षेत्रीय शांति प्रयासों से दूरी, लेकिन पड़ोसियों की सराहना

    हाल ही में पाकिस्तान के इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई, जिसमें ईरान शामिल नहीं हुआ। बघाई ने कहा, “हम पड़ोसी देशों की शांति की कोशिशों का स्वागत करते हैं, लेकिन युद्ध की चर्चा करते समय यह देखना जरूरी है कि संघर्ष की शुरुआत किसने की थी।”

    ईरान फिलहाल अपनी सुरक्षा घेराबंदी को और मजबूत करने में जुटा हुआ है। बंकर में हुई कैबिनेट मीटिंग को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अगर तनाव और बढ़ा तो ईरान अपनी पूरी प्रशासनिक और सैन्य कमान को इन सुरक्षित भूमिगत ठिकानों से संचालित कर सकता है।



    मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध और बढ़ते युद्ध के खतरे के बीच ईरान का यह कदम दुनिया को एक मजबूत संदेश दे रहा है – हम तैयार हैं। सुरक्षा कारणों से बंकर में बैठक आयोजित करना सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि व्यावहारिक रणनीति भी है।



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