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    दिल्ली से मुंबई तक मचा हड़कंप! बंगाल चुनाव 2026 के लिए प्रवासी मजदूरों के पलायन, वोटर लिस्ट से नाम कटने का डर


    दिल्ली से मुंबई तक मचा हड़कंप! बंगाल चुनाव 2026 के लिए प्रवासी मजदूरों के पलायन, वोटर लिस्ट से नाम कटने का डर


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    रिपोर्टर:अमित कुमार सिंह सीनियर पॉलिटिकल कॉरेस्पॉन्डेंट, We News 24 (दिल्ली-मुंबई फील्ड रिपोर्ट)


    कोलकाता/दिल्ली-मुंबई, 31 मार्च 2026 – पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों से हजारों प्रवासी मजदूर अपने घर पलायन कर रहे हैं। रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड़, टिकट की कमी और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई है। मजदूर हर हाल में पश्चिम बंगाल पहुंचकर वोट डालना और अपना नाम वोटर लिस्ट में दर्ज कराना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि अगर उन्होंने वोट नहीं डाला तो उनका नाम वोटर लिस्ट से कट सकता है।


    वोट कटने का डर क्यों?

    प्रवासी मजदूरों का कहना है कि वे दिल्ली-मुंबई में मजदूरी करके परिवार का पेट पाल रहे हैं, लेकिन उनकी जड़ें पश्चिम बंगाल में हैं। अगर बंगाल की वोटर लिस्ट से नाम कट गया तो वे न दिल्ली-मुंबई में वोट डाल सकेंगे और न बंगाल में। कई मजदूरों ने बताया कि Special Intensive Revision (SIR) के बाद जारी नई वोटर लिस्ट में उनका नाम नहीं मिल रहा है। इसलिए वे गांव लौटकर नाम जुड़वाने और वोट डालने के लिए मजबूर हैं।

    दक्षिण दिल्ली की बंगाली बस्ती में रहने वाले करीब 6000 बंगाली मुस्लिम प्रवासी मजदूर भी इसी डर से बंगाल वापस जाना चाहते हैं। ये लोग कई दशकों से दिल्ली में रह रहे हैं, लेकिन उनके पास अभी भी बंगाल का वोटर कार्ड है।



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    मुंबई के ज्वेलरी मजदूरों में खलबली

    मुंबई के जावेरी बाजार में काम करने वाले पश्चिम बंगाल के हजारों प्रवासी मजदूर ज्वैलरी इंडस्ट्री से जुड़े हैं। इनमें से कई के नाम वोटर लिस्ट में नहीं दिख रहे हैं। बंगाल स्वर्ण शिल्प कल्याण संघ के महासचिव कालीदास सिन्हा रॉय ने बताया कि मुंबई से पश्चिम बंगाल के लिए सिर्फ 7 ट्रेनें चल रही हैं, जिससे टिकट की भारी कमी हो गई है।

    संघ ने केंद्रीय रेल मंत्री को पत्र लिखकर अतिरिक्त ट्रेनें चलाने की मांग की है। साथ ही रोडवेज विभाग से एसी बसें चलाने का आग्रह भी किया गया है।


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    मजदूरों की अपनी बात

    1. नारायण (प्रवासी मजदूर, मुंबई): “SIR के बाद वोटर लिस्ट में मेरा नाम नहीं है। इसलिए पश्चिम मेदिनीपुर के गांव लौट रहा हूं। वहां नाम जुड़वाऊंगा और वोट डालूंगा।”
    2. सुनजय डाला (दासपुर, मुंबई): “जावेरी बाजार में कई मजदूरों के नाम लिस्ट में नहीं हैं। सिर्फ एक महीने का समय है। नाम जुड़वाना जरूरी है, ताकि भावी पीढ़ी का नाम भी लिस्ट में जुड़ सके।”

    रेलवे और प्रशासन पर दबाव

    रेलवे अधिकारी स्टेशनों पर बढ़ती भीड़ को देखकर हैरान हैं। दिल्ली, मुंबई, हावड़ा और अन्य स्टेशनों पर विशेष रूप से पश्चिम बंगाल जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ देखी जा रही है। मजदूर किसी भी तरीके से – जनरल टिकट, वेटिंग या अनारक्षित डिब्बों में भी घर पहुंचना चाहते हैं।


    We News 24 विश्लेषण (दिल्ली डेस्क):
    पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 से पहले यह पलायन सिर्फ वोट डालने का मामला नहीं है, बल्कि वोटर अधिकार और अस्तित्व का सवाल बन गया है। अगर हजारों मजदूरों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो गए हैं तो यह चुनाव आयोग और राज्य सरकार दोनों के लिए बड़ी चुनौती है। राजनीतिक दलों पर भी दबाव बढ़ रहा है कि वे प्रवासी मजदूरों की समस्या को गंभीरता से लें।


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