सीतामढ़ी में ‘इस्लाम परवेज द्वार’ विवाद: सार्वजनिक धन से निजी परिवार का नामकरण — कानूनी उल्लंघन या प्रशासनिक भ्रष्टाचार?
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वी न्यूज 24 | We News 24 सीतामढ़ी, बिहार | 20 अप्रैल 2026
सीतामढ़ी। सीतामढ़ी नगर निगम द्वारा सार्वजनिक फंड से निर्मित “इस्लाम परवेज द्वार” को लेकर विवाद अब चरम पर पहुंच गया है। स्थानीय जनता और विपक्षी पार्षदों का आरोप है कि यह द्वार मेयर रौनक जहां परवेज के पिता इस्लाम परवेज के नाम पर जानबूझकर रखा गया है, जो स्पष्ट हितों का टकराव (Conflict of Interest) और नगर निगम अधिनियम की धारा-नियमों का सीधा उल्लंघन है।
तस्वीरों और उद्घाटन दस्तावेजों में गेट पर “इस्लाम परवेज द्वार” और मेयर रौनक जहां परवेज का नाम स्पष्ट अंकित है। अभी तक कोई आधिकारिक बोर्ड प्रस्ताव, नीति अनुपालन या जन-सुनवाई का रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया गया है।
कानूनी सवाल जो उठ रहे हैं (Legal Questions):
- क्या सार्वजनिक धन से बने किसी ढांचे का नामकरण किसी निजी व्यक्ति (मेयर के पिता) के नाम पर किया जा सकता है? यह Bihar Municipal Corporation Act, 2007 की धारा 78, 79 तथा Conflict of Interest Rules का स्पष्ट उल्लंघन है।
- क्या नगर निगम बोर्ड की मंजूरी ली गई थी? कोई बोर्ड रेजोल्यूशन या मिनट्स उपलब्ध नहीं।
- नामकरण नीति का पालन हुआ या नहीं? बिहार सरकार की नामकरण गाइडलाइंस 2016 तथा Smart City Mission Guidelines में स्पष्ट है कि सार्वजनिक संपत्ति का नामकरण केवल ऐतिहासिक, धार्मिक या सामाजिक महत्व के व्यक्तियों के नाम पर ही हो सकता है, न कि किसी पदाधिकारी के निजी रिश्तेदार के नाम पर।
यदि उल्लंघन साबित होता है तो यह IPC धारा 409 (Criminal Breach of Trust by Public Servant), Prevention of Corruption Act, 1988 तथा Bihar Municipal Act के अंतर्गत दंडनीय अपराध बनता है। स्थानीय लोग RTI दाखिल कर फाइलें मंगवा रहे हैं और CBI/ED जांच की मांग कर रहे हैं।
मेयर पति का बचाव और जनता का पलटवार
मेयर के पति ने दावा किया है कि “इस्लाम परवेज एक महान व्यक्तित्व थे, उन्होंने शायरी की एक-दो किताबें लिखीं और बिहार के राज्यपाल द्वारा सम्मानित किए गए थे।”
मेयर पक्ष अब अपनी गलती छुपाने के लिए पूर्व पार्षदों पर दोष मढ़ रहा है। उन्होंने कहा — “सुवंश राय ने यादव द्वार बनवाया, बीएन सिंह ने अपना द्वार बनवाया।”
आरिफ मुखिया का टैक्स वाला बयान — धार्मिक विभेद की नई बहस
आरिफ मुखिया ने कहा — “मुसलमान भी टैक्स देते हैं,तो क्या आप मनमानी करेंगे ? इसी पैसे को आप शहर के विकाश में लगाते अभी शहर में हजारो समस्या है .
यह बयान सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) तथा अनुच्छेद 27 (करों का धार्मिक आधार पर उपयोग) का सीधा उल्लंघन प्रतीत होता है।
सवाल: जब मेयर रौनक जहां परवेज हैं तो आरिफ मुखिया मीडिया में सफाई क्यों दे रहे हैं? क्या यह मेयर का आधिकारिक प्रतिनिधित्व है या व्यक्तिगत?
और एक चौंकाने वाली बात: कुछ हिंदू वार्ड पार्षद भी इस कृत्य में इनका साथ दे रहे हैं। जनता पूछ रही है — क्या सत्ता की लालच में धार्मिक पहचान भी बिक गई?
सीतामढ़ी की असली सच्चाई — विकास पीछे, नामकरण आगे
सीतामढ़ी को मां जानकी की जन्मभूमि माना जाता है। यहां जानकी द्वार, लक्ष्मण द्वार, हनुमान द्वार और राम द्वार बनाने की चर्चा थी, लेकिन बजाय उसके “इस्लाम परवेज द्वार” बन गया।
वी न्यूज 24 की मांग:
- तत्काल न्यायिक जांच हो।
- यदि अनियमितता साबित हुई तो मेयर रौनक जहां परवेज पर कार्रवाई हो।
- द्वार का नाम तुरंत बदलकर किसी सार्वजनिक/धार्मिक महत्व के नाम पर रखा जाए।
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(यह रिपोर्ट तथ्यों, दस्तावेजों और स्थानीय स्रोतों पर आधारित है। किसी भी पक्ष को दोषी ठहराए बिना केवल सवाल उठाए गए हैं।)
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