सीतामढ़ी नगर निगम में ‘पम्पिंग सेट मॉडल’ पर सवाल: करोड़ों का डीज़ल, फिर भी जलजमाव कायम
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22 अप्रैल 2026
सीतामढ़ी | बिहार :-Sitamarhi नगर निगम एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। शहर में जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था के बजाय वर्षों से अस्थायी “पम्पिंग सेट मॉडल” पर निर्भरता, भारी खर्च और जमीनी स्तर पर नतीजों की कमी—इन सबने भ्रष्टाचार की आशंका को और गहरा कर दिया है।
कोट बाज़ार में सालों से चल रहा पम्पिंग सेट, करोड़ों का डीज़ल खर्च
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“झाड़ू से लेकर नाले तक—हर काम में कमीशन?”
नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि:
- सफाई कार्यों में इस्तेमाल होने वाले झाड़ू की खरीद तक में कमीशनखोरी होती है
- एक नाला बनाने के बजाय पानी निकालने के लिए जनरेटर और पम्पिंग सेट पर दोगुना खर्च दिखाया जाता है
- खर्च की गई राशि का एक बड़ा हिस्सा कथित तौर पर कमीशन के रूप में बंटता है
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतें व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती हैं।
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जनता पूछ रही—टैक्स के बदले क्या मिल रहा?
नगर निगम द्वारा नियमित रूप से टैक्स वसूला जा रहा है, लेकिन बदले में:
- नालों की स्थायी व्यवस्था नहीं
- जलजमाव की समस्या बरकरार
- सफाई व्यवस्था कमजोर
- अस्थायी उपायों पर लगातार खर्च
ऐसे में नागरिक पूछ रहे हैं—टैक्स का पैसा आखिर जा कहां रहा है?
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जिम्मेदारों पर उठ रहे सवाल
क्या होगी जांच?
शहर में बढ़ते आक्रोश के बीच अब मांग उठ रही है कि:
- पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए
- पम्पिंग सेट और डीज़ल खर्च का ऑडिट सार्वजनिक किया जाए
- स्थायी समाधान के लिए RCC नालों का निर्माण किया जाए
- सफाई व्यवस्था की जमीनी निगरानी सुनिश्चित हो
निष्कर्ष: अस्थायी समाधान या संगठित लापरवाही?
सीतामढ़ी में वर्षों से चल रहा यह “पम्पिंग सेट मॉडल” अब सवालों के घेरे में है। क्या यह केवल प्रशासनिक विफलता है, या फिर इसके पीछे कोई संगठित लापरवाही और भ्रष्टाचार का खेल?
जब तक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, तब तक शहर की जनता को जलजमाव और गंदगी से राहत मिलती नहीं दिख रही।
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