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    बंगाल में चुनावी हिंसा की पुरानी परंपरा कायम, मुर्शिदाबाद में वोटर्स पर बम से हमला, कई घायल


    बंगाल में चुनावी हिंसा की पुरानी परंपरा कायम, मुर्शिदाबाद में वोटर्स पर बम से हमला, कई घायल


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    वी न्यूज 24 | कोलकाता

    रिपोर्टर: सुप्रियो बनर्जी


    कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनाव हो और वोटिंग के दौरान हिंसा न हो – ऐसा शायद अब तक किसी ने सोचा भी नहीं था। बंगाल के पहले चरण की वोटिंग के दौरान मुर्शिदाबाद में एक बार फिर वही दृश्य देखने को मिला, जिसकी उम्मीद थी। 23 अप्रैल को मतदान जारी था कि तभी तृणमूल कांग्रेस और अलग हुए नेता हुमायूं कबीर के कार्यकर्ताओं के बीच इतनी तीखी झड़प हुई कि हालात हिंसा में बदल गए।


    वोटिंग के दौरान वोटरों पर बम बरसाए गए

    घटना मुर्शिदाबाद के एक मतदान केंद्र की है, जहां सुबह से शांतिपूर्ण तरीके से मतदान चल रहा था। लोग कतारों में लगे थे और अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। तभी अचानक देसी बमों के धमाके हुए। हमले में कई मतदाता गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले की आवाज सुनते ही पूरे बूथ पर अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कई लोगों ने अपने परिजनों को ढूंढते हुए चीख-पुकार मचा दी। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों और मेडिकल सेंटरों में भर्ती कराया गया है।


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    तृणमूल और हुमायूं कबीर गुट में भिड़ंत

    जानकारी के मुताबिक, मामला तब शुरू हुआ जब तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और पार्टी से अलग हुए हुमायूं कबीर के समर्थकों के बीच पहले नोकझोंक हुई, फिर धक्का-मुक्की और देखते ही देखते मारपीट और बमबाजी में बदल गई। हालात इतने बिगड़े कि वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों को भी विरोध का सामना करना पड़ा और कुछ स्थानों पर सुरक्षाबलों के साथ भी धक्का-मुक्की की खबरें सामने आई हैं।


    घायलों की संख्या अभी स्पष्ट नहीं

    अभी तक इस बमबारी में घायलों की सही संख्या सामने नहीं आई है। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल होने के कारण प्रशासन अभी तक सटीक आंकड़ा नहीं जुटा पाया है। मृतकों की कोई पुष्टि अब तक नहीं हुई है, लेकिन हमले की गंभीरता को देखते हुए चिंता बढ़ गई है।





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    दीघा में गर्मी से एक की मौत

    वहीं, दीघा में एक शख्स की गर्मी के चलते मौत हो गई। मतदान केंद्रों पर लंबी कतारों और उमस भरी गर्मी ने मतदाताओं को बेहाल कर दिया। बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा।


    प्रशासन का दावा – हालात काबू में, जांच जारी

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा बल मौके पर पहुंच गए। अतिरिक्त फोर्स तैनात कर इलाके को चारों तरफ से घेर लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि हमले के पीछे कौन लोग हैं, इसका पता लगाने के लिए सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। आसपास के इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है।


    तनाव में पूरा इलाका, लोग सहमे हुए

    इस घटना के बाद पूरे मुर्शिदाबाद इलाके में तनाव साफ नजर आ रहा है। लोग डरे हुए हैं और अब भी माहौल भारी बना हुआ है। प्रशासन लगातार लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील कर रहा है, ताकि स्थिति और न बिगड़े।

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    बंगाल में चुनावी हिंसा: कोई नई बात नहीं

    बंगाल का चुनावी इतिहास रहा है कि यहां मतदान के दौरान हिंसा लगभग तय सी होती है। हर चुनाव में कहीं न कहीं झड़पें, बमबारी या मारपीट की खबरें जरूर आती हैं। मुर्शिदाबाद की यह घटना उसी कड़ी की नवीनतम कड़ी है। राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन आम मतदाता सबसे अधिक परेशान है, जो अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए आता है और बमों की गूंज के बीच अपनी जान बचाने को मजबूर हो जाता है।


    अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्त कार्रवाई करता है और क्या बंगाल में कभी ऐसे चुनाव होंगे जहां हिंसा नहीं होगी?



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