सीतामढ़ी वार्ड 8 वैदेही तालाब पर संकट: गंदा नाले का पानी बहने से सीतामढ़ी की धरोहर खतरे में
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सीतामढ़ी संवाददाता पवन साह के साथ सीनियर पत्रकार दीपक कुमार :
तारीख: 13 मई 2026
सीतामढ़ी शहर के वार्ड नंबर 8 स्थित ऐतिहासिक वैदेही तालाब आज गंभीर संकट से गुजर रहा है। यह वही तालाब है जिसे शहर की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में देखा जाता रहा है। लेकिन अब आरोप है कि नगर निगम की लापरवाही और गलत जलनिकासी व्यवस्था के कारण नाले का गंदा पानी सीधे तालाब में छोड़ा जा रहा है, जिससे इसका अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस तालाब को बचाने, सुंदर बनाने और संरक्षित करने की जिम्मेदारी प्रशासन की थी, उसी तालाब को सीवर और नाले के पानी से प्रदूषित किया जा रहा है। इससे न केवल जल स्रोत नष्ट हो रहा है, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंच रही है।
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छठ पर्व तक प्रभावित, आस्था पर चोट
वैदेही तालाब वर्षों से स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र रहा है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु छठ पर्व मनाने पहुंचते थे। लेकिन इस बार तालाब की हालत इतनी खराब बताई जा रही है कि कई लोगों ने यहां छठ पर्व नहीं मनाया।
स्थानीय महिलाओं का कहना है:
“जहां कभी दीप जलते थे, वहां अब बदबूदार पानी और गंदगी है। यह सिर्फ तालाब नहीं, हमारी आस्था थी।”
नगर परिषद से नगर निगम तक, व्यवस्था क्यों बिगड़ी?
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार जब सीतामढ़ी नगर परिषद था, तब तालाब की नियमित सफाई, देखरेख और संरक्षण होता था। समय-समय पर घाटों की मरम्मत होती थी और पर्वों से पहले साफ-सफाई सुनिश्चित की जाती थी।
लेकिन नगर निगम बनने के बाद व्यवस्था मजबूत होने के बजाय कई स्थानों पर बदहाली बढ़ने का आरोप लगाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि योजनाएं बनीं, घोषणाएं हुईं, लेकिन जमीन पर संरक्षण कार्य नहीं दिखा।
कानूनी सवाल: क्या यह पर्यावरण अपराध नहीं?
यदि किसी ऐतिहासिक जलाशय में जानबूझकर नाले का पानी छोड़ा जा रहा है, तो यह कई गंभीर कानूनी सवाल खड़े करता है:
संभावित कानूनी पहलू:
- जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत जल स्रोत को प्रदूषित करना अपराध माना जा सकता है।
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत सार्वजनिक जलाशय को नुकसान पहुंचाना दंडनीय मामला बन सकता है।
- यदि तालाब सार्वजनिक धार्मिक उपयोग में है, तो यह जनहित और सांस्कृतिक अधिकारों का भी मामला है।
- नगर निकाय का कर्तव्य है कि वह सार्वजनिक संपत्ति, जल निकासी और जल संरक्षण सुनिश्चित करे।
जिम्मेदार कौन?
अब बड़ा सवाल यह है कि इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है?
- संबंधित वार्ड पार्षद?
- नगर निगम प्रशासन?
- नगर आयुक्त?
- मेयर और उप मेयर?
- या फिर पूरे सिस्टम की उदासीनता?
यदि तालाब में नाले का पानी वर्षों से जा रहा है, तो क्या किसी अधिकारी ने निरीक्षण किया? क्या जल परीक्षण हुआ? क्या सफाई योजना बनी? क्या बजट खर्च हुआ? जनता जवाब चाहती है।
स्थानीय लोगों की मांग
वैदेही तालाब बचाने के लिए लोगों ने प्रशासन से मांग की है:
- नाले का पानी तत्काल तालाब में जाने से रोका जाए
- तालाब की वैज्ञानिक सफाई कराई जाए
- जल गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
- छठ घाटों का पुनर्निर्माण हो
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो
- तालाब को हेरिटेज जोन घोषित किया जाए
जनहित का मुद्दा, सिर्फ राजनीति नहीं
वैदेही तालाब केवल पानी का गड्ढा नहीं है। यह सीतामढ़ी की पहचान, इतिहास, संस्कृति और जनभावना से जुड़ा स्थान है। यदि इसे नहीं बचाया गया, तो आने वाली पीढ़ियां सिर्फ नाम सुनेंगी, तालाब नहीं देखेंगी।
बड़ा सवाल
जिस धरोहर को नगर निगम बचाने की जिम्मेदारी रखता है, अगर वही उसकी लापरवाही से खत्म हो रही है—तो क्या यह सिर्फ लापरवाही है, या जनता के अधिकारों के खिलाफ जुर्म?
सीतामढ़ी अब जवाब चाहता है।
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