छह महीने में टूट जाती हैं सड़कें! सीतामढ़ी नगर निगम में विकास या कमीशनखोरी?
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सीतामढ़ी संवाददाता पवन साह के साथ सीनियर पत्रकार दीपक कुमार :
तारीख: 12 मई 2026
सीतामढ़ी | सीतामढ़ी शहर में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर के कई इलाकों में बनी नई सड़कें महज छह महीने के भीतर ही टूटने लगी हैं। कहीं गड्ढे उभर आए हैं, कहीं किनारे धंस गए हैं, तो कहीं सड़क की परत उखड़ने लगी है। ऐसे हालात ने नगर निगम की कार्यशैली और निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जनता को टिकाऊ सड़कें नहीं मिल पा रही हैं। हर साल नई सड़कें बनती हैं, लेकिन कुछ ही महीनों में उनकी हालत जर्जर हो जाती है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
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जनता का आरोप: गुणवत्ता नहीं, कमीशन पर फोकस
कई वार्डों के निवासियों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से ज्यादा कमीशनखोरी पर ध्यान दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि घटिया सामग्री, कम मोटाई और तकनीकी मानकों की अनदेखी के कारण सड़कें जल्दी टूट जाती हैं।
एक स्थानीय दुकानदार ने कहा:
“सड़क बनते ही खुशी होती है, लेकिन कुछ महीने बाद वही सड़क गड्ढों में बदल जाती है। जनता का पैसा आखिर जा कहाँ रहा है?”
बारिश में खुलती है पोल
मानसून शुरू होते ही सड़कों की असलियत सामने आने लगती है। हल्की बारिश में ही सड़कें उखड़ने लगती हैं, जलजमाव हो जाता है और गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। बाइक सवार, स्कूली बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान होते हैं।
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निगरानी व्यवस्था पर सवाल
नगर निगम और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। यदि निर्माण कार्य सही मानकों से हो रहा है, तो इतनी जल्दी सड़कें खराब कैसे हो रही हैं? क्या काम पूरा होने से पहले गुणवत्ता जांच होती है? क्या दोषी ठेकेदारों पर कार्रवाई होती है?
इन सवालों का जवाब जनता जानना चाहती है।
विशेषज्ञों की राय
सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के अनुसार सड़क निर्माण में यदि बेस लेयर, ड्रेनेज सिस्टम, उचित मोटाई और गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग न किया जाए, तो सड़क जल्दी खराब हो जाती है। साथ ही निगरानी और समय पर मेंटेनेंस भी जरूरी होता है।
जनता की मांग
सीतामढ़ीवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि:
- सड़क निर्माण कार्यों की स्वतंत्र जांच कराई जाए
- घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए
- गुणवत्ता मानकों को सार्वजनिक किया जाए
- वार्ड स्तर पर निगरानी समिति बनाई जाए
- टिकाऊ और दीर्घकालिक सड़क निर्माण कराया जाए
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बड़ा सवाल
सीतामढ़ी में जो सड़कें छह महीने भी नहीं टिक पा रहीं, क्या उसे विकास कहा जाए या फिर कमीशनखोरी का खेल?
यदि समय रहते इस व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह चरमरा सकता है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।
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