जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन निर्णायक मोड़ पर; सोनम वांगचुक के अस्पताल से अपील के बावजूद संसद मार्च को पुलिस ने दी अनुमति से इनकार
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Reporter: गौतम कुमार , WE NEWS 24 स्थान: नई दिल्ली
नई दिल्ली: NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्र आत्महत्याओं के विरोध में जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन सोमवार (20 जुलाई) को निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन CJP द्वारा प्रस्तावित संसद मार्च को दिल्ली पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इसके बावजूद आंदोलनकारियों ने मार्च को सफल बनाने के लिए पूरी तैयारी कर ली है, जबकि पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
CJP के आह्वान पर जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर थे। शनिवार को उनके 21वें दिन पुलिस ने उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल भर्ती कराया। अस्पताल में भर्ती रहते हुए भी वांगचुक ने अपना अनशन जारी रखा है। रविवार को अनशन का 22वां दिन था। उन्होंने हाथ से लिखे संदेश में देशभर के युवाओं से 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल होने की अपील की और इसे ‘भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन’ बताया।
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पुलिस की सख्ती और सुरक्षा व्यवस्था
नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने स्पष्ट किया कि 20 जुलाई को संसद मार्च के लिए CJP को कोई अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 लागू है। नई दिल्ली जिले में विरोध प्रदर्शन केवल जंतर-मंतर के निर्धारित स्थान पर पूर्व अनुमति से ही किए जा सकते हैं।
पुलिस ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
- संसद और आसपास के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात।
- मुख्य रास्तों पर मजबूत बैरिकेडिंग और वाहनों की सघन जांच।
- 24 घंटे निगरानी और हाई अलर्ट।
- पांच या अधिक व्यक्तियों के जमावड़े पर रोक (निषेधाज्ञा)।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
CJP NEET पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं और इससे जुड़ी छात्र आत्महत्याओं के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रही है। सोनम वांगचुक के अनशन के बाद CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके भी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। वामपंथी छात्र संगठनों ने भी मार्च को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
हल्की बारिश के बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ रही है। अस्पताल से जारी वांगचुक का भावुक संदेश आंदोलन को नया आयाम दे रहा है।
WE NEWS 24 लगातार इस स्थिति पर नजर रखे हुए है। संसद सत्र शुरू होने के साथ ही इस आंदोलन के राजनीतिक और प्रशासनिक नतीजे महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
अपडेटेड: 20 जुलाई 2026
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