यूरोप में मानव तस्करी का काला नेटवर्क: नौकरी का झांसा, पासपोर्ट जब्त और फिर देह व्यापार की दलदल में धकेली जा रहीं महिलाएं
लैटिन अमेरिकी देशों की महिलाओं को नौकरी और बेहतर जिंदगी का सपना दिखाकर यूरोप बुलाया जा रहा है। जर्मनी और स्पेन में मानव तस्करी और जबरन देह व्यापार के खिलाफ पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है।
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नई दिल्ली | We News24 | अंतरराष्ट्रीय डेस्क
यूरोप में मानव तस्करी और जबरन देह व्यापार का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है। आर्थिक तंगी और बेरोजगारी से जूझ रहे लैटिन अमेरिकी देशों की हजारों महिलाओं को बेहतर नौकरी, मॉडलिंग और आलीशान जीवन का सपना दिखाकर यूरोप बुलाया जाता है। वहां पहुंचते ही उनके पासपोर्ट और पहचान संबंधी दस्तावेज जब्त कर उन्हें जबरन देह व्यापार में धकेल दिया जाता है।
जर्मनी और स्पेन की पुलिस इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार अभियान चला रही है, लेकिन अपराधियों का संगठित गिरोह इतना मजबूत और जटिल है कि पीड़ित महिलाओं तक पहुंचकर उन्हें न्याय दिलाना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
गरीबी और बेरोजगारी का उठा रहे फायदा
कोलंबिया, वेनेजुएला, पेरू और अन्य लैटिन अमेरिकी देशों में आर्थिक संकट और बेरोजगारी के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं विदेश में रोजगार तलाशती हैं। मानव तस्कर इन्हीं परिस्थितियों का फायदा उठाते हैं।
उन्हें केयरटेकर, वेट्रेस, क्लीनर, होटल स्टाफ या मॉडलिंग जैसे आकर्षक रोजगार का झांसा देकर यूरोप बुलाया जाता है। लेकिन वहां पहुंचते ही उनके दस्तावेज छीन लिए जाते हैं और उन्हें देह व्यापार के लिए मजबूर किया जाता है।
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जर्मनी को क्यों कहा जाता है 'यूरोप का वेश्यालय'?
जर्मनी में वेश्यावृत्ति कानूनी रूप से नियंत्रित गतिविधि है और लाइसेंस प्राप्त वेश्यालय संचालित किए जा सकते हैं। इसी वजह से यहां सेक्स इंडस्ट्री का बड़ा बाजार विकसित हुआ है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कानूनी व्यवस्था की आड़ में कई बार मानव तस्करी और जबरन देह व्यापार जैसे अपराध भी छिप जाते हैं। यही कारण है कि आलोचक जर्मनी को "यूरोप का वेश्यालय" तक कहने लगे हैं।
कोविड के बाद बदला पूरा नेटवर्क
कोविड-19 महामारी के बाद इस अवैध कारोबार का स्वरूप तेजी से बदल गया। पहले यह गतिविधियां मुख्य रूप से वेश्यालयों तक सीमित थीं, लेकिन अब निजी अपार्टमेंट, किराये के फ्लैट और होटल इस नेटवर्क के नए ठिकाने बन गए हैं।
इस बदलाव से पुलिस के लिए निगरानी और छापेमारी पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गई है।
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20-20 घंटे तक कराया जाता है शोषण
रिपोर्टों के अनुसार कई महिलाओं से दिन में 20 घंटे तक देह व्यापार कराया जाता है। उन्हें बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती और लगातार निगरानी में रखा जाता है।
पुलिस की कार्रवाई के बावजूद क्यों नहीं बोलतीं पीड़िताएं?
जर्मनी और स्पेन की पुलिस लगातार संदिग्ध वेश्यालयों, होटलों और अपार्टमेंट्स पर छापेमारी कर रही है। लेकिन बचाई गई महिलाएं अक्सर खुलकर अपनी आपबीती नहीं बता पातीं।
मानव तस्करी के गिरोह उन्हें और उनके परिवार को गंभीर नुकसान पहुंचाने की धमकी देते हैं। इसी डर के कारण कई महिलाएं पुलिस के सामने भी यही कहती हैं कि वे अपनी इच्छा से यह काम कर रही हैं।
सोशल मीडिया बना तस्करों का नया हथियार
अब मानव तस्करी का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित हो रहा है। सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और ऑनलाइन विज्ञापन वेबसाइटों के जरिए ग्राहकों से संपर्क कराया जाता है।
कई मामलों में पीड़ित महिलाओं के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट भी तस्करों के नियंत्रण में रहते हैं, ताकि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
सिर्फ कानून बदलने से नहीं रुकेगा अपराध
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून सख्त करने से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, पीड़ितों की सुरक्षा, आर्थिक पुनर्वास और मानव तस्करी से जुड़े वित्तीय नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है।
स्वीडन और फ्रांस जैसे देशों में सेक्स खरीदना अपराध माना जाता है, फिर भी मानव तस्करी का नेटवर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका है।
संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार मानव तस्करी दुनिया के सबसे बड़े संगठित अपराधों में शामिल है। वर्ष 2020 से 2023 के बीच दुनिया भर में करीब दो लाख मामलों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने का अनुमान है।
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि हर वर्ष लाखों लोग किसी न किसी रूप में मानव तस्करी का शिकार बनते हैं।
सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ी चुनौती पीड़ित महिलाओं का विश्वास जीतना और उन्हें कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है। कई महिलाएं बचाए जाने के बाद भी अपराधियों के खिलाफ गवाही देने से डरती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक गरीबी, बेरोजगारी, पलायन, लैंगिक असमानता और अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक मानव तस्करी का यह कारोबार नए-नए रूपों में जारी रहने की आशंका बनी रहेगी।

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