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    मोदी सरकार का बड़ा फैसला: जानलेवा खरपतवारनाशक 'पैराक्वाट' पर देशभर में प्रतिबंध, आयात से बिक्री तक सब बंद

    मोदी सरकार का बड़ा फैसला: जानलेवा खरपतवारनाशक 'पैराक्वाट' पर देशभर में प्रतिबंध, आयात से बिक्री तक सब बंद


    सब-हेडलाइन:

    कृषि मंत्रालय ने जारी किया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन, 30 दिन में मांगे सुझाव; आयात, निर्माण, बिक्री, परिवहन और उपयोग पर लगेगी रोक


    📢 We News 24 Digital News / वी न्यूज 24 डिजिटल

    रिपोर्टर:अंकित वर्मा   | We News 24 Digital Desk 


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने किसानों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने देशभर में अत्यधिक विषैले खरपतवारनाशक पैराक्वाट डाइक्लोराइड (Paraquat Dichloride) पर प्रतिबंध लगाने के लिए आधिकारिक ड्राफ्ट अधिसूचना जारी कर दी है। प्रस्तावित प्रतिबंध लागू होने के बाद इस रसायन का आयात, निर्माण, बिक्री, परिवहन, वितरण और उपयोग प्रतिबंधित हो जाएगा।

    हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह फिलहाल ड्राफ्ट नोटिफिकेशन है। अंतिम अधिसूचना जारी करने से पहले प्रभावित पक्षों, किसानों, कंपनियों और आम नागरिकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं।


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    क्यों है पैराक्वाट इतना खतरनाक?

    विशेषज्ञों के अनुसार पैराक्वाट डाइक्लोराइड दुनिया के सबसे खतरनाक कृषि रसायनों में से एक माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति गलती से इसे निगल ले या गंभीर रूप से इसके संपर्क में आ जाए, तो उसकी जान बचाना बेहद कठिन हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि इस रसायन का कोई प्रभावी एंटीडोट (प्रतिरोधी दवा) उपलब्ध नहीं है।

    यह रसायन फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ किडनी, लिवर, त्वचा और आंखों को भी प्रभावित कर सकता है।


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    मूंग की फसल में अवैध इस्तेमाल बना चिंता का कारण

    सरकारी दस्तावेजों के अनुसार पैराक्वाट को केवल कुछ सीमित फसलों—जैसे चाय, आलू, कपास, रबर, कॉफी, धान, गेहूं, मक्का और अंगूर—में उपयोग की अनुमति थी।

    लेकिन कई राज्यों में कटाई से पहले मूंग की फसल को जल्दी सुखाने के लिए इसका कथित रूप से अवैध इस्तेमाल किया जा रहा था। इससे खाद्यान्न में रसायन के अवशेष मिलने की आशंका बढ़ी, जिसे सरकार ने गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता माना।


    कंपनियों को तीन महीने में करना होगा सरेंडर

    ड्राफ्ट अधिसूचना के अनुसार, प्रतिबंध लागू होने के बाद इस रसायन से जुड़े पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द माने जाएंगे। संबंधित निर्माता और डीलरों को अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र और उपलब्ध स्टॉक निर्धारित प्रक्रिया के तहत तीन महीने के भीतर संबंधित प्राधिकरण के समक्ष जमा करने होंगे। आदेश का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    राज्य सरकारों को भी निरीक्षण करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के अधिकार दिए गए हैं।

    कई देशों में पहले से लागू है प्रतिबंध

    दुनिया के कई देशों ने वर्षों पहले ही पैराक्वाट पर प्रतिबंध लगा दिया था। सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी चिंताओं को देखते हुए विभिन्न देशों ने अलग-अलग समय पर इसके उपयोग पर रोक लगाई है।

    30 दिन तक मांगे जाएंगे सुझाव

    चूंकि यह अभी ड्राफ्ट अधिसूचना है, इसलिए केंद्र सरकार ने सभी हितधारकों को 30 दिनों के भीतर अपने सुझाव और आपत्तियां भेजने का अवसर दिया है। प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।

    यदि अंतिम अधिसूचना वर्तमान स्वरूप में लागू होती है, तो पैराक्वाट डाइक्लोराइड भारत में प्रतिबंधित कृषि रसायनों की सूची में शामिल हो जाएगा।

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