परिसीमन को लेकर संसद में घमासान, राज्यों की सहमति के बिना नहीं चलेगी प्रक्रिया
परिसीमन को लेकर संसद में सियासी घमासान तेज है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने राज्यों की सहमति के बिना सीटों के पुनर्विन्यास पर सवाल उठाते हुए संघीय ढांचे की चिंता जताई।
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नई दिल्ली। संसद में परिसीमन और इससे जुड़े संभावित संविधान संशोधन को लेकर सियासी टकराव तेज होता नजर आ रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की रणनीति पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि परिसीमन के मुद्दे पर सरकार विपक्षी दलों के बीच आम सहमति बनाने में सफल नहीं हो पाई है।
जयराम रमेश का आरोप है कि राज्यों और विपक्षी दलों से व्यापक चर्चा किए बिना सीटों के पुनर्गठन की दिशा में आगे बढ़ना देश के संघीय ढांचे के लिए गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। कांग्रेस का कहना है कि परिसीमन की प्रक्रिया में सभी राज्यों के हितों और उनकी चिंताओं को बराबर महत्व दिया जाना चाहिए।
जनसंख्या के आधार पर सीटों के बंटवारे पर विवाद
परिसीमन को लेकर सबसे बड़ा राजनीतिक विवाद लोकसभा सीटों के संभावित पुनर्विन्यास को लेकर है। विपक्षी दलों की चिंता है कि यदि भविष्य में सीटों का निर्धारण मुख्य रूप से जनसंख्या के आधार पर होता है तो उन राज्यों को राजनीतिक नुकसान हो सकता है, जिन्होंने लंबे समय तक जनसंख्या नियंत्रण की नीतियों को प्रभावी तरीके से लागू किया है।
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कांग्रेस विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्यों की चिंताओं को सामने रखती रही है। पार्टी का तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के प्रतिनिधित्व पर किसी भी संभावित बदलाव को उनके लिए राजनीतिक नुकसान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
जयराम रमेश ने इसी मुद्दे को संघीय ढांचे से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से राज्यों और विपक्षी दलों के साथ व्यापक बातचीत की मांग की है।
संविधान संशोधन को लेकर बहुमत का सवाल
परिसीमन से जुड़े किसी भी बड़े संवैधानिक बदलाव के लिए संसद में आवश्यक बहुमत एक अहम राजनीतिक मुद्दा है। जयराम रमेश ने दावा किया है कि सरकार विपक्षी दलों का भरोसा हासिल करने में सफल नहीं हुई है।
हालांकि, किसी भी प्रस्ताव की वास्तविक स्थिति और उसके संसदीय चरण का आकलन आधिकारिक विधेयक, सदन की कार्यसूची और संसद में हुई कार्यवाही के आधार पर ही किया जाना उचित होगा।
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महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर कांग्रेस की आपत्ति
परिसीमन की बहस का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला आरक्षण भी है। कांग्रेस का कहना है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़कर टालने के बजाय इसे मौजूदा लोकसभा सीटों के दायरे में लागू किया जाना चाहिए।
पार्टी का तर्क है कि महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार जरूरी नहीं होना चाहिए।
विपक्षी दलों के बीच बढ़ रहा समन्वय
परिसीमन का मुद्दा अब केवल कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच विवाद तक सीमित नहीं है। दक्षिण और पूर्वी भारत के कई राजनीतिक दल भी जनसंख्या आधारित सीट पुनर्विन्यास को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर करते रहे हैं।
विपक्षी दलों की कोशिश है कि इस मुद्दे पर राज्यों के अधिकार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संघीय संतुलन को एक साथ उठाया जाए।
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अब सरकार के अगले कदम पर नजर
परिसीमन की प्रक्रिया देश के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लंबे समय तक प्रभावित कर सकती है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाना केंद्र सरकार के लिए भी महत्वपूर्ण चुनौती है।
फिलहाल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल व्यापक विचार-विमर्श की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर आगे की रणनीति और किसी औपचारिक प्रस्ताव की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।
परिसीमन से जुड़े घटनाक्रम पर अब संसद की आगामी कार्यवाही और सरकार-विपक्ष के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हैं।
रिपोर्ट: आदित्य राज, राजनीतिक संवाददाता | We News 24
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