सुकून की तलाश में संगीत: भागती जिंदगी में धुनें बन रही हैं मन की छांव, जानिए कैसे बदलता है मूड
भागदौड़ भरी जिंदगी में संगीत तनाव और मानसिक थकान से राहत पाने का सहारा बन रहा है। जानिए शांत संगीत, शास्त्रीय धुनों और म्यूजिक थेरेपी का मूड व नींद से क्या संबंध है।
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नई दिल्ली। जिंदगी की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। सुबह आंख खुलने से लेकर रात बिस्तर पर जाने तक काम, मोबाइल, सोशल मीडिया, जिम्मेदारियां और भविष्य की चिंता दिमाग को लगातार व्यस्त रखती है। ऐसे में लोगों के बीच अब एक शब्द तेजी से लोकप्रिय हो रहा है—सुकून।
किसी को शांत जगह पसंद है, किसी को अकेले बैठना अच्छा लगता है और कोई कुछ मिनट अपने पसंदीदा संगीत के साथ बिताकर खुद को हल्का महसूस करता है। खास बात यह है कि संगीत अब सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गया है। बहुत से लोग इसे दिनभर के तनाव से थोड़ी देर राहत पाने के साधन के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
फिल्म 'गाइड' के मशहूर गीत की पंक्तियां जीवन की इसी तलाश को एक अलग अंदाज में सामने रखती हैं। जिंदगी की लगातार भागदौड़ के बीच इंसान को कभी-कभी ऐसी जगह चाहिए होती है, जहां वह कुछ देर ठहर सके और खुद को फिर से महसूस कर सके।
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संगीत बना तनाव से बचने का छोटा ब्रेक
दफ्तर जाते समय ईयरफोन लगाकर पसंदीदा गाना सुनना हो या काम खत्म करने के बाद कुछ देर शांत संगीत सुनना, लोगों की रोजमर्रा की आदतों में संगीत की भूमिका बढ़ी है।
म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग मूड के हिसाब से तैयार प्लेलिस्ट भी इसी बदलाव को दिखाती हैं। रिलैक्सेशन, स्लीप, मेडिटेशन, फोकस और स्ट्रेस रिलीफ जैसे नामों वाली प्लेलिस्ट अब आम हो चुकी हैं।
कई लोगों के लिए संगीत दिन के बीच लिया जाने वाला एक छोटा मानसिक ब्रेक बन गया है।
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नींद के लिए भी संगीत का सहारा
भागदौड़ भरी जिंदगी में अच्छी नींद हासिल करना भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। देर रात तक मोबाइल चलाना, काम का तनाव और लगातार बदलती जीवनशैली नींद के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है।
इसी वजह से स्लीप ट्रैकर, मेडिटेशन ऐप और रिलैक्सेशन ऑडियो जैसे डिजिटल साधनों का इस्तेमाल बढ़ा है। धीमी आवाज और शांत लय वाली धुनें सोने से पहले दिमाग को शांत माहौल देने में मदद कर सकती हैं।
हालांकि, बेहतर नींद के लिए केवल संगीत पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। नियमित दिनचर्या, स्क्रीन टाइम कम करना और सोने का उचित समय भी महत्वपूर्ण है।
शास्त्रीय संगीत और दिमाग का संबंध
संगीत का असर केवल भावनाओं तक सीमित नहीं माना जाता। विभिन्न अध्ययनों में संगीत और मस्तिष्क की गतिविधियों के बीच संबंध पर शोध किया गया है।
विशेष रूप से भारतीय शास्त्रीय संगीत में अलग-अलग रागों और लय का इस्तेमाल लंबे समय से मनोदशा तथा एकाग्रता से जोड़कर देखा जाता रहा है। कुछ लोगों को धीमी और गंभीर धुनें शांत करती हैं, जबकि कुछ को हल्का वाद्य संगीत अधिक पसंद आता है।
यही वजह है कि आज म्यूजिक थेरेपी को भी मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन के सहायक उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसमें व्यक्ति की पसंद, संगीत से जुड़ी उसकी पृष्ठभूमि और उसकी जरूरत को ध्यान में रखकर संगीत का चयन किया जाता है।
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आखिर संगीत मूड कैसे बदल देता है?
जब हम कोई धुन सुनते हैं तो हमारा मस्तिष्क उसे तुरंत प्रोसेस करता है। संगीत से जुड़ी आवाज, लय और परिचित धुनें भावनाओं तथा यादों से जुड़े हिस्सों को सक्रिय कर सकती हैं।
इसीलिए कोई पुराना गाना अचानक बचपन की याद दिला देता है, कोई धुन उदासी के समय भावुक कर देती है और कोई तेज-तर्रार गीत ऊर्जा से भर देता है।
यानी संगीत का असर सिर्फ कानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हमारी यादों और भावनाओं से भी जुड़ जाता है।
अपनी प्लेलिस्ट बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
जब मन थक जाए तो कुछ देर ठहरना भी जरूरी
आज की जिंदगी में सबसे बड़ी समस्या शायद यह है कि हम लगातार चलते रहना चाहते हैं। काम खत्म होते ही मोबाइल, सोशल मीडिया और दूसरी गतिविधियां हमारा ध्यान घेर लेती हैं। ऐसे में मन को वास्तव में आराम देने का समय कम होता जा रहा है।
संगीत इस भागदौड़ के बीच कुछ मिनटों का ठहराव दे सकता है। कोई व्यक्ति बांसुरी की धुन पसंद करता है तो कोई सितार, पियानो या प्रकृति की आवाजों में सुकून तलाशता है।
जरूरी यह नहीं कि कौन-सा संगीत सबसे अच्छा है। जरूरी यह है कि आपके मन को कौन-सी धुन कुछ देर के लिए शांत कर पाती है।
अगर लगातार तनाव, बेचैनी, नींद की समस्या या मन खराब रहने जैसी परेशानियां बनी रहती हैं, तो केवल संगीत पर निर्भर रहने के बजाय किसी योग्य चिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
कभी-कभी जिंदगी को बदलने के लिए किसी बड़े फैसले की नहीं, बल्कि कुछ मिनट ठहरकर खुद को सुनने की जरूरत होती है। शायद यही वह छोटी-सी छांव है जिसकी तलाश में हम रोज इतनी दूर निकल जाते हैं।
रिपोर्ट: नेहा शर्मा, फीचर डेस्क | We News 24
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