जंतर-मंतर के Gen Z आंदोलन के बाद BJP ने बदली रणनीति, युवाओं तक पहुंच बढ़ाने पर जोर

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नई दिल्ली | स्थानीय रिपोर्टर: प्रियंका जयसवाल
जंतर-मंतर पर परीक्षा सुधारों को लेकर चले Gen Z आंदोलन के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की रणनीति में बदलाव किया है। पार्टी अब सिर्फ सोशल मीडिया अभियानों पर निर्भर रहने के बजाय युवा चेहरों को आगे लाने, परिवारों और स्थानीय नेटवर्क के जरिए जमीनी संपर्क बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसका मकसद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बढ़ते प्रभाव को थामना है।
25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से आंदोलन का गुस्सा कम होने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। BJP और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) दोनों ने इसे सिर्फ परीक्षा विवाद नहीं, बल्कि ज्यादा गंभीर चुनौती माना। चिंता इस बात को लेकर थी कि प्रदर्शन में सिर्फ विपक्षी या वामपंथी छात्र संगठन ही नहीं, बल्कि BJP के पारंपरिक समर्थक परिवारों के युवा भी शामिल हो रहे थे।
दोहरी रणनीति अपनाई गई
पार्टी दो काम एक साथ कर रही है। पहला—युवाओं की वास्तविक शिकायतों (पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था, रोजगार, कोचिंग खर्च) को CJP की राजनीतिक मुहिम से अलग रखना। BJP इन शिकायतों का विरोध नहीं कर रही, लेकिन नहीं चाहती कि CJP इनके जरिए अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करे।
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दूसरा—यह संदेश देना कि मोदी सरकार सुन सकती है और सुधार कर सकती है। इसके तहत पेपर लीक मामलों में सख्त सजा के प्रावधान वाले कानून जल्द लाए गए। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार के लिए टास्क फोर्स बनाया गया। युवा सांसदों—बांसुरी स्वराज, तेजस्वी सूर्या, राघव चड्ढा और सहयोगी दल की सायोनी घोष—को मैदान में उतारा गया।
यह तरीका संघ की पारंपरिक कार्यशैली से ज्यादा मेल खाता है। संघ ड्रॉइंग रूम, हॉस्टल, मोहल्लों और छोटी बैठकों में धीरे-धीरे राय बदलने पर जोर देता रहा है। अब BJP भी राज्यों में स्थानीय नेताओं के जरिए छोटे कार्यक्रमों से Gen Z तक पहुंच रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इंस्टाग्राम रील्स के जरिए शुरुआत की, जिसे जमीनी कार्यकर्ता आगे बढ़ा रहे हैं।
भागवत के संदेश और संगठनात्मक बदलाव
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दो कार्यक्रमों में Gen Z से संवाद किया। 6 अगस्त को मुंबई में उन्होंने कहा कि युवाओं की चिंताएं वास्तविक हैं और प्रदर्शन लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का जायज तरीका है। युवाओं को राष्ट्रविरोधी नहीं कहना चाहिए। 15 अगस्त को नागपुर में उन्होंने सावधानी भरा रुख अपनाया और कहा कि विरोध जायज है, बशर्ते राष्ट्रीय हित का ध्यान रखा जाए।
संगठन स्तर पर भी बदलाव हुए। 17 अगस्त को 11 साल से सोशल मीडिया प्रमुख रहे अमित मालवीय की जगह दीपक म्हस्के को जिम्मेदारी दी गई। म्हस्के का जोर इंस्टाग्राम, रील्स, सटीक जानकारी और गलत सूचनाओं के मुकाबले पर है। BJP अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम और हेमांग जोशी को युवा मोर्चा प्रमुख बनाए जाने से भी युवा चेहरों को आगे लाने का संकेत मिलता है।
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असली परीक्षा बाकी
15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी ने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग और एक करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने की घोषणा की। ये कदम आंदोलन की मुख्य चिंताओं से जुड़े थे।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि संदेशों में बदलाव पर्याप्त नहीं। युवाओं की शिकायतें परीक्षा केंद्रों, कोचिंग संस्थानों, भर्ती बोर्डों और परिवारों के बजट से जुड़ी हैं। अगर फिर पेपर लीक होता है या नौकरियां नहीं आतीं तो भाषा बदलाव से समस्या नहीं सुलझेगी।
BJP का आकलन है कि उसे इस पीढ़ी से पूर्ण सहमति से ज्यादा यह भरोसा दिलाना है कि शिकायत करने से नतीजा निकलता है। फैसला अब अगली परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया में होगा। 2014 में मोदी ने एक पीढ़ी को भारत बदलने का मौका देने की बात कही थी। जिस पीढ़ी को वे अब संबोधित कर रहे हैं, उसने उन्हें हमेशा सत्ता में देखा है और वह जानना चाहती है कि बदलाव इतना धीमा क्यों रहा।
वी न्यूज 24 | नई दिल्ली
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