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    जस्टिस सूर्यकांत: वो 10 ऐतिहासिक फैसले जिन्होंने भारतीय न्यायपालिका की दिशा बदल दी

    जस्टिस सूर्यकांत: वो 10 ऐतिहासिक फैसले जिन्होंने भारतीय न्यायपालिका की दिशा बदल दी


    We News 24 :डिजिटल डेस्क » विवेक श्रीवास्तव

     नई दिल्ली, 23 नवंबर 2025 :- न्यायमूर्ति सूर्यकांत 24 नवंबर 2025 को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश बनने जा रहे हैं। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक के उनके सफर में कई ऐसे फैसले हैं, जिन्होंने कानून की किताबें भी बदल दीं और समाज को नई दिशा दी। ये हैं उनके सबसे बड़े 10 फैसले:


    किसान आंदोलन के दौरान इंटरनेट बहाली (जनवरी 2021)

    जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा – “इंटरनेट पर अनिश्चितकालीन प्रतिबंध असंवैधानिक है। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है।” हरियाणा में इंटरनेट 100+ दिन बंद था – उनकी बेंच ने तुरंत बहाल करवाया।


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    पेगासस जासूसी मामला (अक्टूबर 2021)

    जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा – “राष्ट्रीय सुरक्षा का नाम लेकर नागरिकों की निजता का हनन नहीं हो सकता।” सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी विशेषज्ञ समिति गठित की, जो आज तक की सबसे बड़ी जांच बनी।

    लखीमपुर खीरी हिंसा: आशीष मिश्रा को जमानत रद्द (अप्रैल 2022)

    जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार और हाईकोर्ट को कड़ी फटकार लगाते हुए आशीष मिश्रा की जमानत रद्द की। कहा – “न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।”


    महाराष्ट्र राजनीतिक संकट (मई 2022)

    उद्धव ठाकरे बनाम एकनाथ शिंदे मामले में जस्टिस सूर्यकांत की 5-जज बेंच ने फ्लोर टेस्ट पर रोक लगाई और संविधान पीठ को भेजा। बाद में स्पीकर के चुनाव पर भी ऐतिहासिक फैसला दिया।


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    CAA विरोध प्रदर्शनों पर शाहीन बाग फैसला (अक्टूबर 2020)

    जस्टिस सूर्यकांत ने कहा – “लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक जगह को अनिश्चितकाल तक बंधक नहीं बनाया जा सकता।” यह फैसला आज भी प्रदर्शनों की सीमा तय करने का आधार है।


    हरियाणा में OBC आरक्षण पर रोक (जनवरी 2022)

    पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने 57% आरक्षण को असंवैधानिक बताया। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे बरकरार रखा।


    महिलाओं को NDA में प्रवेश का रास्ता (अगस्त 2021)

    जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने महिलाओं को नेशनल डिफेंस अकादमी में प्रवेश देने का अंतरिम आदेश दिया। कहा – “लिंग के आधार पर भेदभाव अस्वीकार्य है।”


    हेट स्पीच पर सख्ती (अप्रैल 2023)

    जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने सभी राज्यों को निर्देश दिया – “हेट स्पीच के खिलाफ स्वत: संज्ञान लें, चाहे शिकायत हो या न हो।” टीवी एंकरों पर भी सख्त टिप्पणी की।


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    ईडी निदेशक संजय मिश्रा का कार्यकाल विस्तार रद्द (जुलाई 2023)

    जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा – “कानून से ऊपर कोई नहीं।” संजय मिश्रा का तीसरा विस्तार रद्द कर दिया।


    बिलकिस बानो केस: दोषियों की रिहाई रद्द (जनवरी 2024)

    जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की बेंच ने गुजरात सरकार के रिहाई आदेश को रद्द करते हुए सभी 11 दोषियों को 15 दिन में जेल भेजने का आदेश दिया। कहा – “न्याय की आँखों पर पट्टी नहीं बाँधी जा सकती।”


    जस्टिस सूर्यकांत को कानूनी हलकों में “नागरिक स्वतंत्रता का प्रहरी” कहा जाता है। उनके फैसलों में संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और सरकार को जवाबदेह बनाने की स्पष्ट झलक मिलती है।

    कल जब वे CJI की कुर्सी पर बैठेंगे, तो भारत को उम्मीद होगी कि न्यायपालिका और मजबूत, और नागरिकों के अधिकार और सुरक्षित होंगे।



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