पुनौराधाम में मां जानकी का भव्य मंदिर: पर्यटन मंत्री ने ठोका 42 महीने का दांव “अयोध्या की तरह बनेगा सीता मंदिर”
We News 24 :डिजिटल डेस्क » पवन साह
सीतामढ़ी, 23 नवंबर 2025 :- सरकार बनने के बाद पहली बार सीतामढ़ी पहुंचे पर्यटन, कला-संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने मां जानकी के चरणों में शीश नवाया और बड़ा ऐलान कर दिया – “अयोध्या की तर्ज पर पुनौराधाम में माता सीता का भव्य-दिव्य मंदिर बनेगा। 42 महीने में काम पूरा करने की चुनौती मैंने स्वीकार की है।”
सुबह सबसे पहले मंत्री पुनौराधाम पहुंचे। जानकी मंदिर में महंत कौशल किशोर दास और उत्तराधिकारी रामकुमार दास ने पूजा-अर्चना कराई, मां की चुनरी भेंट की। भावुक महंत ने आशीर्वाद देते हुए कहा, “मेरी आंखें बंद होने से पहले माता सीता का भव्य मंदिर देखना चाहता हूं।” मंत्री ने हाथ जोड़कर वादा किया – “महंत जी, आपकी आंखों का सपना जरूर पूरा होगा।”
ये भी पढ़े-जस्टिस सूर्यकांत: वो 10 ऐतिहासिक फैसले जिन्होंने भारतीय न्यायपालिका की दिशा बदल दी
882 करोड़ का ड्रीम प्रोजेक्ट: सोमवार से बाउंड्री का काम शुरू
भूमि अधिग्रहण पूरा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही शिलान्यास किया
सोमवार से बाउंड्री वॉल का सीमांकन शुरू
जैसे ही वित्तीय निविदा खुलेगी, सीधे निर्माण शुरू
मंत्री ने मीडिया से कहा, “यह मेरा विभाग का ड्रीम प्रोजेक्ट है। 882 करोड़ रुपये में विश्वस्तरीय मंदिर बनेगा। पर्यटकों के लिए होटल, धर्मशाला, पार्किंग, म्यूजियम – सब कुछ होगा। सीतामढ़ी को दुनिया के नक्शे पर स्थापित करेंगे।”
मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर को मिलेगा नया जीवन
अरुण शंकर प्रसाद ने आगे कहा, “पर्यटन ही वह क्षेत्र है जो सबसे ज्यादा रोजगार देता है। एनडीए सरकार ने 2030 तक एक करोड़ रोजगार का संकल्प लिया है – उसमें मिथिला की कला, संस्कृति और पर्यटन की बड़ी भूमिका होगी। उर्विजा कुंड, सीता कुंड, रजत द्वार जानकी मंदिर – सबको भव्य रूप दिया जाएगा।”
मौके पर कौन-कौन था?
परिहार विधायक गायत्री देवी
रीगा विधायक बैद्यनाथ प्रसाद
विधान पार्षद रेखा कुमारी
निवर्तमान मंत्री मोतीलाल प्रसाद
पूर्व विधायक रामनरेश यादव, नगीना देवी
भाजपा नेता प्रो. उमेश चंद्र झा, दिनकर प्रसाद, डॉ. प्रवीण कुमार समेत सैकड़ों कार्यकर्ता
ये भी पढ़े-G20 Summit 2025: अमेरिकी बहिष्कार के बावजूद डिक्लेरेशन पास,अब धमकी या ताकत का नहीं होगा इस्तेमाल
मंत्री ने रजत द्वार जानकी मंदिर और उर विजा कुंड में भी पूजा-अर्चना की। लोगों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया। एक बुजुर्ग महिला ने आशीर्वाद देते हुए कहा, “बाबू, माई के मंदिर बनवा दीजिए, हमारा जीवन सफल हो जाएगा।”
सीतामढ़ी अब सिर्फ जन्मभूमि नहीं, विश्व के नक्शे पर “मां जानकी की नगरी” के रूप में उभरेगी – यह वादा अरुण शंकर प्रसाद ने मां के चरणों में रख दिया है।
कोई टिप्पणी नहीं
कोमेंट करनेके लिए धन्यवाद