हरियाणा में पेपरलेस रजिस्ट्री का पहला महाघोटाला: 50 करोड़ की जमीन 6 करोड़ में बेच दी, अफसरों की भूमिका संदिग्ध
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रिपोर्ट — आशीष कौशिक, वी न्यूज 24 | सोनीपत
हरियाणा में मुख्यमंत्री की ओर से लागू की गई पेपरलेस रजिस्ट्री योजना का पहला बड़ा घोटाला सामने आ गया है। सोनीपत जिले की गन्नौर तहसील में 50 करोड़ रुपये की कीमत की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के सहारे महज 6.16 करोड़ रुपये में बेच दिया गया, और असली मालिक को इसकी भनक तक नहीं लगी।
यह मामला न सिर्फ सिस्टम की पोल खोलता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह राजस्व विभाग के भीतर बैठे कुछ लोग पूरे सिस्टम को मजाक बना रहे हैं।
📌 क्या है पूरा मामला?
दिल्ली के शालीमार बाग निवासी बिकास पाड़िया ने 12 जनवरी को गन्नौर एसीपी को दी शिकायत में बताया कि उनकी फर्म सपाज एस्टेट प्रा. लि. के नाम गन्नौर बाई रोड पर करीब 36 कनाल जमीन है, जिसकी खरीद वर्ष 2011 में की गई थी।
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तहसील में जांच करने पर खुलासा हुआ कि नसीरपुर बांगर निवासी प्रमोद कुमार ने फर्जी अथॉरिटी लेटर बनवाकर खुद को जमीन का मालिक बताते हुए जींद के पिल्लूखेड़ा निवासी बलबीर सिंह के नाम जमीन बेच दी।
🧾 ऐसे रचा गया पूरा फर्जीवाड़ा
- फर्जी अथॉरिटी लेटर तैयार किया गया
- दस्तावेजों में दिखाया गया कि अगस्त से अक्टूबर 2025 के बीच RTGS से पेमेंट हुई
- 27 नवंबर 2025 को 61.68 लाख रुपये के स्टांप पर रजिस्ट्री करा दी गई
- खरीदार ने फर्जी आधार कार्ड लगाया
- गवाह और नंबरदार की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई
हैरानी की बात यह है कि विक्रेता, खरीदार, गवाह और नंबरदार — सभी के दस्तावेज फर्जी थे, लेकिन फिर भी नायब तहसीलदार ने रजिस्ट्री कर दी।
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🚨 नायब तहसीलदार की भूमिका सवालों के घेरे में
इस रजिस्ट्री को करने वाले नायब तहसीलदार अमित कुमार पर पहले भी गड़बड़ियों के आरोप लग चुके हैं। इस मामले में भी उन्होंने दस्तावेजों की बुनियादी जांच तक नहीं की।
यहां तक कि:
- नंबरदार को रिकॉर्ड में महिला बताया गया है, जबकि फोटो में पुरुष है
- दोनों गवाहों के मोबाइल नंबरों में सिर्फ आखिरी अंक अलग है
⚠️ मामला खुलने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं
मामला सामने आने के बाद:
- न तो रजिस्ट्री रद की गई
- न कोई जांच कमेटी बनाई गई
- न ही अब तक एफआईआर दर्ज हुई
- बल्कि शिकायतकर्ता पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने की भी बात सामने आ रही है।
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🗣️ सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाए सवाल
न्याय युद्ध संस्था के संस्थापक देवेंद्र गौतम ने कहा कि इस पूरे मामले में:
“नायब तहसीलदार, फर्जी मालिक, खरीदार, गवाह और डीड राइटर — सभी की भूमिका संदिग्ध है। यह सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक संगठित साजिश लगती है।”
🏛️ अधिकारियों के बयान
नायब तहसीलदार अमित कुमार का कहना है कि:
“रजिस्ट्री के समय दस्तावेज सही प्रतीत हो रहे थे। बाद में जांच में फर्जी पाए गए। विक्रेता के खिलाफ केस दर्ज करने की सिफारिश की गई है।”
गन्नौर एसीपी ऋषिकांत का कहना है:
“मामले की जांच की जाएगी, कोई दबाव नहीं है।”
वहीं हरियाणा के राजस्व मंत्री विपुल गोयल ने कहा है:
“मामले की रिपोर्ट मंगाई जाएगी। पेपरलेस सिस्टम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
❗ बड़ा सवाल
अगर पेपरलेस सिस्टम में भी 50 करोड़ की जमीन हड़पी जा सकती है, तो आम आदमी की जमीन कितनी सुरक्षित है?
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