Header Ads

ad728
  • Latest Stories

    सर्वदलीय बैठक में TMC बागियों को बुलाने पर विवाद, किरेन रिजिजू ने दिया जवाब


    सर्वदलीय बैठक में TMC बागियों को बुलाने पर विवाद, किरेन रिजिजू ने दिया जवाब




    मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में TMC के बागी सांसदों की नई पार्टी एनसीपीआई को बुलाने पर विपक्ष ने विरोध जताया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने संसदीय नियमों का पालन किया है।


    📢 We News 24 Digital News / वी न्यूज 24 डिजिटल

    रिपोर्टर: राहुल सिंह  | We News 24 Digital Desk 

    नई दिल्ली | We News24 | संवाददाता

    संसद के मानसून सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों की नई पार्टी नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) को आमंत्रित किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया। विपक्षी दलों ने इसका विरोध करते हुए बैठक से सांकेतिक वॉकआउट किया, हालांकि कुछ देर बाद वे दोबारा बैठक में शामिल हो गए।

    बैठक के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सरकार ने पूरी तरह संसदीय नियमों का पालन किया है। उन्होंने कहा कि एनसीपीआई ने लोकसभा अध्यक्ष से मान्यता का अनुरोध किया है, इसलिए उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार का दायित्व है कि सभी संबंधित दलों को बैठक में आमंत्रित किया जाए।

    मानसून सत्र में आठ विधेयक होंगे पेश

    रिजिजू ने बताया कि 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र के लिए फिलहाल आठ विधेयक सूचीबद्ध किए गए हैं। यदि कोई अन्य विधायी कार्य सामने आता है तो उसे भी संसदीय प्रक्रिया के अनुसार सदन में लाया जाएगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर दल को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है और सरकार सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी।


    यह भी पढ़ें-

    123

    छतरपुर विधानसभा में अवैध कॉलोनियों और निर्माण को लेकर विधायक-पर्षद पर समाजसेवी के गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग



    विपक्ष ने क्यों किया विरोध?

    विवाद तब शुरू हुआ जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एनसीपीआई बनाने वाले 20 बागी टीएमसी सांसदों के लिए सदन में अलग बैठने की व्यवस्था को मंजूरी दी। इसके विरोध में विपक्षी दलों ने बैठक से सांकेतिक वॉकआउट किया।

    टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन सांसदों के विलय को अभी तक औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है और उनके खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाएं भी लंबित हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में इन सांसदों को अलग राजनीतिक दल के रूप में आमंत्रित करने का आधार स्पष्ट नहीं है।

    टीएमसी के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि संवैधानिक और संसदीय प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए।

    एनसीपीआई ने किया सरकार के फैसले का बचाव

    वहीं, एनसीपीआई के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि उनकी पार्टी को सरकार की ओर से आधिकारिक निमंत्रण मिला था, जिसके आधार पर वे बैठक में शामिल हुए। उनका कहना था कि आमंत्रण मिलने के बाद बैठक में भाग लेना पूरी तरह उचित था।


    ये भी पढ़े-

    .com/img/a/


    बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एनसीपीआई में शामिल 20 सांसदों को मानसून सत्र से पहले आयोजित इस पारंपरिक सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किया था। साथ ही डॉ. काकोली घोष दस्तीदार को बैठक के लिए पार्टी के चीफ व्हिप के रूप में मान्यता दी गई।

    20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र

    संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश कर सकती है। विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि सरकार ने सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी दलों से सहयोग की अपील की है।

    कोई टिप्पणी नहीं

    कोमेंट करनेके लिए धन्यवाद

    Post Top Ad

    ad728

    Post Bottom Ad

    ad728