होर्मुज पर ईरान-ओमान के बीच बनी सहमति! तेल और LPG टैंकरों की आवाजाही शुरू होने की उम्मीद, अमेरिका पर टिकी निगाहें
ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित जहाजरानी को लेकर सहमति की खबर है। तेल और LPG टैंकरों की आवाजाही शुरू होने की उम्मीद के बीच अमेरिका की प्रतिक्रिया पर दुनिया की नजर है।
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नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच चल रही बातचीत से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच रणनीतिक समुद्री मार्ग से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर सहमति बनी है। इसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और एलपीजी ले जाने वाले टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है।
हालांकि, इस घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल अमेरिका के रुख को लेकर है। ईरान और ओमान के बीच हुई यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका और ईरान के संबंध बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में तेहरान और मस्कट के बीच बनी सहमति पर वॉशिंगटन की प्रतिक्रिया को बेहद अहम माना जा रहा है।
सुरक्षित जहाजरानी को अलग मुद्दे के तौर पर देख रहा ईरान
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई के मुताबिक, ओमान के साथ कई मुद्दों पर बातचीत चल रही है। हालांकि, जहाजों की सुरक्षित आवाजाही से जुड़ी व्यवस्था को एक अलग विषय के रूप में देखा जा रहा है।
बघाई ने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में होर्मुज जलडमरूमध्य में पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल करना आसान नहीं है। उनके मुताबिक, अमेरिकी प्रतिबंधों और क्षेत्र में जारी नौसैनिक गतिविधियों के बीच जलमार्ग में सामान्य और पूरी तरह सुरक्षित परिस्थितियां कायम करने की अपनी चुनौतियां हैं।
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ट्रंप के बयान से बढ़ा विवाद
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विवाद उस समय और चर्चा में आ गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान ईरान के खिलाफ जारी संघर्ष में अमेरिका की जीत का भरोसा जताया।
ट्रंप ने कथित तौर पर यह भी कहा कि ईरान को पराजित करने के बाद अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को अपने क्षेत्र का हिस्सा घोषित कर सकता है। हालांकि, बाद में वॉल स्ट्रीट जर्नल ने व्हाइट हाउस के एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट किया कि ट्रंप की यह टिप्पणी मजाक के तौर पर की गई थी।
ईरान ने इस बयान को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया। उप-विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया मंच X पर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का दावा कायम रहेगा और इसके संचालन से जुड़े फैसलों में तेहरान की भूमिका बनी रहेगी।
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दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में शामिल है।
इस जलमार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और LNG/LPG समेत अन्य ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही होती है। यही वजह है कि होर्मुज में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि, नाकेबंदी या जहाजों की आवाजाही में बड़ी बाधा का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों से लेकर समुद्री परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति तक पर इसका असर देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि अमेरिका समेत कई देश इस समुद्री मार्ग को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला रखने पर जोर देते रहे हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच समझौते के मायने
ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर बनी सहमति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है।
कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बन चुका है। ऐसी चर्चाएं भी सामने आई हैं कि यदि ईरान जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य करता है तो अमेरिका अपनी कुछ शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों को रोकने पर विचार कर सकता है।
हालांकि, ईरान की ओर से यह संकेत मिलता रहा है कि किसी भी व्यापक समझौते के लिए उसकी प्रमुख मांगों पर सहमति जरूरी होगी। इसमें क्षेत्र में जारी सैन्य टकराव को खत्म करना भी शामिल है।
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अब अमेरिका के अगले कदम पर नजर
ईरान और ओमान के बीच बनी यह सहमति फिलहाल तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के तौर पर देखी जा रही है। लेकिन इससे होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच मौजूद मूल विवाद खत्म नहीं हुआ है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अमेरिका इस समझौते को किस नजर से देखता है और क्या वॉशिंगटन इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में उठाया गया कदम मानता है या इसके खिलाफ कोई नया दबाव बनाता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस टैंकरों की निर्बाध आवाजाही केवल ईरान और ओमान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए आने वाले दिनों में इस समझौते पर अमेरिका और अन्य प्रमुख देशों की प्रतिक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की भी नजर रहेगी।
रिपोर्ट: आर्यन प्रताप, विशेष संवाददाता | We News 24
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