पाक-अफगान तनाव चरम पर:इस्तांबुल वार्ता से पहले रक्षा मंत्री आसिफ दी युद्ध की धमकी
We News 24 :डिजिटल डेस्क »अपडेटेड: 6 नवंबर 2025, दोपहर 1:30 बजे (IST)
इस्लामाबाद/काबुल | पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्ध की आहट तेज हो गई है। तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में आज शुरू हुई शांति वार्ता से ठीक पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तालिबान सरकार को खुली धमकी दी है। एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "यदि वार्ता विफल रही, तो युद्ध अवश्यंभावी है।" यह बयान दोहा में अक्टूबर 2025 के संघर्ष के बाद बनी नाजुक सीजफायर को खतरे में डाल रहा है, जहां 70 से अधिक लोग मारे गए थे। तुर्की और कतर की मध्यस्थता में हो रही इस तीसरी वार्ता में सीमा झड़पें, ड्रोन हमले और व्यापारिक नुकसान प्रमुख मुद्दे हैं, लेकिन आसिफ की धमकी ने माहौल को गरमा दिया। अफगानिस्तान ने पाकिस्तानी आरोपों का खारिज करते हुए इसे 'कूटनीतिक नैतिकता का उल्लंघन' बताया।
यह तनाव 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से बढ़ा है, जहां पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान मिट्टी का इस्तेमाल TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) जैसे समूहों के हमलों के लिए हो रहा। एक अफगान किसान, नाम न छापने की शर्त पर, कहते हैं, "शांति की बातें हो रही हैं, लेकिन सीमा पर गोलियां चल रही। व्यापार बंद, परिवार भूखे।" आइए, इस संकट के तार समझें—जो क्षेत्रीय स्थिरता को हिला सकता है।
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आसिफ की धमकी: 'वार्ता फेल तो युद्ध'—क्यों गरमाया माहौल?
पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर कि तालिबान से निपटने का एकमात्र विकल्प सैन्य टकराव है या नहीं, आसिफ ने कहा, "युद्ध होगा।" उन्होंने अफगानिस्तान पर आतंकवादियों को पनाह देने, सीमा पार हमलों पर चुप्पी और ISIS ट्रेनिंग कैंपों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। अक्टूबर 2025 के संघर्ष में पाकिस्तान ने दावा किया कि अफगान मिट्टी से 25 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। आसिफ ने कहा, "हमारी सेना तालिबान को गुफाओं में धकेल सकती है, लेकिन शांति चाहते हैं।"
अफगानिस्तान ने तुरंत खंडन किया। विदेश मंत्रालय ने कहा, "ये आरोप झूठे हैं। हम ड्रोन हमलों और नागरिक हत्याओं का शिकार हैं।" तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने X पर लिखा, "पाकिस्तान की आक्रामकता शांति को नुकसान पहुंचाएगी।" यह धमकी दोहा सीजफायर (अक्टूबर 19) के बाद आई, जो तुर्की-कतर की मध्यस्थता से बनी थी।
इस्तांबुल वार्ता: सीजफायर को बचाने की कोशिश, लेकिन मुद्दे जटिल
आज शुरू हुई वार्ता में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल (रक्षा मंत्रालय से) और अफगान खुफिया प्रमुख अब्दुल हक वासिक के नेतृत्व वाली टीम शामिल है। प्रमुख मुद्दे:
सीमा झड़पें: स्पिन बोल्डक (कंधार) में अक्टूबर 15 को गोलीबारी, 5 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए।
ड्रोन हमले: पाकिस्तान ने TTP कैंपों पर स्ट्राइक, अफगानिस्तान ने 'नागरिक हत्याओं' का आरोप।
व्यापार ठप: अफगान चैंबर के अनुसार, 8,000 अफगान कंटेनर पाकिस्तान में और 4,000 पाकिस्तानी अफगानिस्तान में फंसे। द्विपक्षीय व्यापार $2.5 बिलियन का नुकसान।
तुर्की विदेश मंत्रालय ने कहा, "सीजफायर जारी रहेगा, इस्तांबुल में कार्यान्वयन पर फैसला।" लेकिन आसिफ की धमकी से उम्मीदें कम।
इशाक डार का दावा झूठा: तालिबान ने 6 कॉल्स का खंडन
विदेश मंत्री इशाक डार ने दावा किया कि अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने एक दिन में 6 बार फोन किया। अफगान मंत्रालय ने खारिज करते हुए कहा, "केवल दो आधिकारिक कॉल्स हुए, आपसी समन्वय के लिए। डार का बयान 'असत्य और कूटनीतिक नैतिकता के विपरीत'।" डार ने इसे 'काबुल में चाय का गलत फैसला' बताया, जो PTI सरकार की गलती थी।
क्षेत्रीय प्रभाव: ट्रंप की 'शांति' टिप्पणी और वैश्विक नजर
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "पाक-अफगान शांति मेरे लिए आसान।" लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं, TTP की वैचारिक जड़ें गहरी हैं। चीन भी मध्यस्थता कर रहा। क्या इस्तांबुल वार्ता सफल होगी, या युद्ध की आग लगेगी? फिलहाल, सीमा पर तनाव बरकरार।
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