🚌 DIMTS का दौर खत्म, फिर से DTC के हाथ में दिल्ली की बस सेवा की कमान
We News 24 : डिजिटल डेस्क »✍️रिपोर्ट: मनोज भारद्वाज |
नई दिल्ली ब्यूरो, वी न्यूज 24
नई दिल्ली। करीब डेढ़ दशक बाद दिल्ली की बस व्यवस्था में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव चुपचाप लेकिन बेहद अहम तरीके से हुआ है। दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी-मॉडल ट्रांजिट सिस्टम (DIMTS) का रोल लगभग खत्म कर दिया गया है और अब दिल्ली परिवहन निगम (DTC) ने फिर से पूरी बस सेवा की कमान अपने हाथ में ले ली है।
यह वही DIMTS है जिसके हाथ में कभी दिल्ली की क्लस्टर बसों की पूरी प्लानिंग, ऑपरेशन और मॉनिटरिंग थी।
🕰️ आखिर DIMTS आया कब और क्यों?
साल 2006–2007 के आसपास दिल्ली सरकार ने महसूस किया कि DTC की हालत बेहद खराब हो चुकी है —
- बसें कम थीं
- घाटा बढ़ता जा रहा था
- मेंटेनेंस खराब
- और सिस्टम लगभग चरमराया हुआ था
इसी दौर में कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 की तैयारी चल रही थी और दिल्ली की पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को “वर्ल्ड क्लास” बनाने की बात हो रही थी।
तभी GNCTD (दिल्ली सरकार) और IDFC के जॉइंट वेंचर से DIMTS बनाया गया।
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किस नियम-कानून के तहत चला DIMTS?
DIMTS को कंपनी एक्ट के तहत बनी SPV (Special Purpose Vehicle) के रूप में खड़ा किया गया और इसे:
- क्लस्टर बस सेवा की प्लानिंग
- रूट डिजाइन
- प्राइवेट ऑपरेटर की बसों का संचालन
- टिकटिंग और कंट्रोल रूम
- और परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग
जैसे अधिकार दे दिए गए।
यानि बसें DTC की, लेकिन दिमाग और कंट्रोल DIMTS का।
🚍 DTC का नियंत्रण कैसे कमजोर पड़ा?
धीरे-धीरे हालात ये हो गए कि:
- DTC सिर्फ ड्राइवर-कंडक्टर और कुछ डिपो तक सीमित रह गया
- रूट, टाइमिंग, क्लस्टर, कॉन्ट्रैक्ट — सब DIMTS तय करने लगा
- बड़े फैसले निगम नहीं, कंपनी लेने लगी
अंदरखाने अधिकारी कहते हैं कि DTC एक ऑपरेटर बनकर रह गया और नीति-निर्माता DIMTS हो गया।
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✅ DIMTS मॉडल से क्या फायदा हुआ?
ईमानदारी से देखें तो कुछ फायदे भी हुए:
- नई लो-फ्लोर और CNG बसें आईं
- GPS, कंट्रोल रूम, ट्रैकिंग सिस्टम लागू हुआ
- प्राइवेट सेक्टर की एंट्री से बसों की संख्या बढ़ी
- कई रूट पर फ्रीक्वेंसी सुधरी
❌ लेकिन नुकसान भी कम नहीं थे
- खर्च बहुत बढ़ गया
- एक सरकारी सेवा पर एक प्राइवेट-स्टाइल कंपनी का कंट्रोल
- जवाबदेही का संकट — गलती DTC की या DIMTS की? तय करना मुश्किल
- कर्मचारियों और यूनियनों में भारी असंतोष
- हर छोटे फैसले में भी कंपनी सिस्टम हावी
अब क्यों खत्म किया गया DIMTS का रोल?
सूत्रों के मुताबिक:
- सरकार को लगने लगा था कि एक ही काम के लिए दो सिस्टम बहुत महंगे पड़ रहे हैं
- कंट्रोल और जवाबदेही बिखर गई थी
- और DTC को जानबूझकर कमजोर बनाए रखा गया
अब फैसला हुआ है कि:
“बसें भी DTC की, सिस्टम भी DTC का, जिम्मेदारी भी DTC की।”
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अब आगे क्या बदलेगा?
- क्लस्टर सिस्टम का पूरा कंट्रोल धीरे-धीरे DTC को मिलेगा
- प्लानिंग, रूट और ऑपरेशन एक ही कमांड में आएगा
- खर्च कम होगा और प्रशासनिक कंट्रोल सीधा होगा
जानकारों की राय
परिवहन मामलों के जानकार मानते हैं:
“DIMTS एक प्रयोग था। कुछ मामलों में सफल, लेकिन लंबे समय में इसने DTC को संस्थागत रूप से कमजोर किया।”
निष्कर्ष
अब देखना होगा कि क्या DTC इस मौके को अपने पुनर्जन्म में बदल पाता है या नहीं।
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